1. जब किसी घनीय जालक के केन्द्र पर स्थित परमाणु विकर्ण पर
उपस्थित अन्य दो परमाणुओं के सम्पर्क में हो तो घनीय संरचना
की संकुलन क्षमता की गणना कीजिए।
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जब किसी घनीय जालक के केन्द्र पर स्थित परमाणु विकर्ण पर उपस्थित अन्य दो परमाणुओं के सम्पर्क में हो तो घनीय संरचना की संकुलन क्षमता की गणना कीजिए।
- काय केन्द्रित घन जालक विभव : निम्नलिखित चित्र से स्पष्ट है कि केन्द्र में स्थित परमाणु तथा अन्य दो तिरछे व्यवस्थित हैं। परमाणुओं के संपर्क में। इस तरह कि संरचना में पारनों की कुल संख्या 2 है और उनका आयतन 2×(4/3)πr3 है। घन का आयतन a3,(4√3r)3 के बराबर होगा।
- फलक-केंद्रित घनीय एकक कोष्ठिका इस प्रकार की एकक कोष्ठिका में इसके कोनों पर 8 परमाणु तथा इसके सभी 6 फलकों पर 6 परमाणु उपस्थित होते हैं। इसका अर्थ है कि इस प्रकार की एकक कोष्ठिका में इसके सभी कोनों और सतहों पर एकक कोष्ठिकाएँ उपस्थित होती हैं। यूनिट सेल में परमाणुओं को गिनने के लिए, प्रत्येक स्थिति में सभी परमाणुओं को गिनें।
- फिर उस अंश से गुणा करें जो यूनिट सेल के अंदर है। /8 जो परमाणु एक कोने में हैं वे यूनिट सेल के अंदर हैं। / 4 परमाणु जो एक किनारे पर होते हैं वे यूनिट सेल के अंदर होते हैं। प्रत्येक घनीय एकक कोष्ठिका के कोनों पर 8 परमाणु होते हैं। तो एक घनीय सेल में एक इकाई कोशिका में परमाणुओं की कुल संख्या 8 × 1/8 = 1 परमाणु है।
- घनीय एकक कोष्ठिका के चारों अंतर्विषमों पर स्थित परमाणुओं का कुल योगदान 8 (4×2=8) है तथा कोनों में स्थित परमाणुओं का योगदान 1 है। इस प्रकार उपस्थित परमाणुओं की कुल संख्या 9 है।
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