English, asked by shahibm486, 6 months ago

21.
उन्नीसवीं सदी के दौरान भारत से गए अनुबंधित प्रवासी श्रमिकों की
स्थिति का वर्णन कीजिए।​

Answers

Answered by badrinath19
2

Answer:

वे कर्मचारी जो पार्क और सुविधाओं में बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहे थे और अपनी सुरक्षा के लिए वे विदेशों में गए थे, उन्हें कोई कमरा नहीं मिला, वे अपने असली या नकली एजेंट के पास जा रहे थे।

Explanation:

they are in very big trouble of their owners

Answered by itzsecretagent
10

\huge\underline\mathfrak\pink{Answer}

19वीं सदी को अनुबंधित श्रम व्यवस्था की एक नई दास प्रथा' के रूप में वर्णित किया जाता है।

  • 19वीं सदी में भारत और चीन के सैकड़ों मजदूर बागानों, खादानों, सड़क और रेलवे निर्माण के लिए विश्व के दूरस्थ देशों में ले जाए गए।
  • यह तेज आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ जनता के कष्टों में वृद्धि, कुछ लोगों की आय में वृद्धि और दूसरों के लिए बेहिसाब गरीबी की दुनिया थीं।
  • भारत में, अनुबंधित मजदूरों को बागानों में पाँच वर्ष काम करके भारत लौट आने का अनुबंध करके किराये पर ले लिया जाता था।
  • कुटीर उद्योग बंद हो रहे थे, जमीन का किराया बढ़ गया था। खानों और बागानों के लिए जमीनों को साफ किया जा रहा था। इन परिवर्तनों से गरीबों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। वे बँटाई पर जमीन तो ले लेते थे, लेकिन उसका किराया नहीं चुका पाते थे। उन पर कर्जा चढ़ने लगा। अतः उन्हें काम की तलाश में अपने घर-बार छोड़ने पड़े।
  • भारतीय अनुबंधित श्रमिकों को मुख्य रूप से कैरिबियाई द्वीप समूह (त्रिनिदाद, गुयाना, सुरीनाम), मॉरिशस, फिजी, सिलॉन एवं मलाया ले जाया जाता था।
  • मजदूरों की भर्ती का काम मालिकों के एजेंट किया करते थे। एजेंटों को कमीशन मिलता था।
  • एजेंट द्वारा भावी अप्रवासियों को फुसलाने के लिए उन्हें कहाँ जाना है, यात्रा के साधन क्या होंगे, क्या काम करना होगा और नयी जगह पर काम व जीवन के हालात कैसे होंगे, इस बारे में झूठी जानकारियाँ दी जाती थीं।
  • अगर कोई मजदूर अप्रवासन के लिए राजी नहीं होता था, तो एजेंट उसका अपहरण कर लेते थे।

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