8निम्नलिखित पद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या करो
तथा काव्यगत सौन्दर्य भी लिखो.
सखी री, मुरली लीजै चोरि ।
जिनि गुपाल कीन्हें अपनें बस, प्रीति सबनि की तोरि ॥
छिन इक घर-भीतर, निसि-बासर, धरतन कबहूँ छोरि।
कबहूँ कर, कबहूँ अधरनि, कटि कबहूँ खोंसत जोरि ॥
ना जानौं कछु मेलि मोहिनी, राखे अंग-अंग भोरि ।
सूरदास प्रभु को मन सजनी, बँध्यौ राग की डोरि ॥
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