अंसुवन जल सींचि-सीचि, प्रेम-बेलि बोयी।
अब तो बेलि फैलि गई, आनंद फल होई।।
(क) प्रस्तुत काव्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए
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अंसुवन जल सींचि-सीचि, प्रेम-बेलि बोयी।
अब तो बेलि फैलि गई, आनंद फल होई।।
भावपक्ष ⦂ अर्थात मीराबाई ने अनेक कष्टों को सहन कर कर करके हृदय में कृष्ण के प्रेम की बेल को बोया और विकसित किया है, अब वह इस बेल को फल-फूलने का समय देना चाहती हैं, उसके पश्चात इस पर कृष्ण प्रेम रूपी आनंद के पल लगेंगे और वह कृष्ण प्रेम के इस आनंद से वंचित नहीं होना चाहतीं।
शिल्प सौंदर्य ⦂ ‘सींचि सींचि’ में ‘पुनरुक्ति-प्रकाश अलंकार’ है। ‘प्रेम-बेलि’ और ‘आनंद-फल’ में ‘रूपक अलंकार’ है।
पद में रास्थानी और ब्रज भाषा की मिश्रित शैली का प्रयोग किया है।
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'अंसुवन जल सींचि-सींचि' पद में कौन सा अलंकार है?
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