आपकी और आपके सहपाठियों की मातृभाषा में पक्षियों से संबंधित बहुत से लोकगीत होंगे। उन भाषाओं के लोकगीतों का एक संकलन तैयार करें। आपकी मदद के लिए एक लोकगीत दिया जा रहा है-
आवउ, अरे अरे श्यामा चिरइया झरोखवै झरोखवै मति मति बोलहु। । मोरी चिरई! अरी मोरी चिरई! सिरकी भितर बनिजरवा। जगाई लइ मनाइ लइ आवउ।।1।। कवने बरन उनकी सिरकी कवने रँग बरदी। बहिनी! कवने बरन बनिजरवा जगाइ लै आई मनाइ लै आई।।2।। जरद बरन उनकी सिरकी उजले रंग बरदी। सँवर बरन बनिजरवा जगाइ लै आवउ मनाइ लै आवउ।।3!!
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आपकी और आपके सहपाठियों की मातृभाषा में पक्षियों से संबंधित बहुत से लोकगीत होंगे। उन भाषाओं के लोकगीतों का एक संकलन तैयार करें। आपकी मदद के लिए एक लोकगीत दिया जा रहा है-
आवउ, अरे अरे श्यामा चिरइया झरोखवै झरोखवै मति मति बोलहु। । मोरी चिरई! अरी मोरी चिरई! सिरकी भितर बनिजरवा। जगाई लइ मनाइ लइ आवउ।।1।। कवने बरन उनकी सिरकी कवने रँग बरदी। बहिनी! कवने बरन बनिजरवा जगाइ लै आई मनाइ लै आई।।2।। जरद बरन उनकी सिरकी उजले रंग बरदी। सँवर बरन बनिजरवा जगाइ लै आवउ मनाइ लै आवउ।।3!!
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हम पछी उन्मुक्त गगन के, पिजर बध न गा पायेंगे
कनक तिलिओ से टकराकर, पुलकित पंख टूट जायेगे
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