Hindi, asked by bhanuvashishtha20, 9 months ago

आदर्श विद्यार्थी पर अनुछेद​

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Answered by manjassp718
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आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi!

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi!विद्‌यार्थी जीवन को मनुष्य के जीवन की आधारशिला कहा जाता है । इस समय वह जिन गुणों व अवगुणों को अपनाता है वही आगे चलकर चरित्र का निर्माण करते हैं । अत: विद्‌यार्थी जीवन सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है ।

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi!विद्‌यार्थी जीवन को मनुष्य के जीवन की आधारशिला कहा जाता है । इस समय वह जिन गुणों व अवगुणों को अपनाता है वही आगे चलकर चरित्र का निर्माण करते हैं । अत: विद्‌यार्थी जीवन सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है ।एक आदर्श विद्‌यार्थी वह है जो परिश्रम और लगन से अध्ययन करता है तथा सद्‌गुणों को अपनाकर स्वयं का ही नहीं अपितु अपने माँ-बाप व विद्‌यालय का नाम ऊँचा करता है । वह अपने पीछे ऐसे उदाहरण छोड़ जाता है जो अन्य विद्‌यार्थियों के लिए अनुकरणीय बन जाते हैं ।

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi!विद्‌यार्थी जीवन को मनुष्य के जीवन की आधारशिला कहा जाता है । इस समय वह जिन गुणों व अवगुणों को अपनाता है वही आगे चलकर चरित्र का निर्माण करते हैं । अत: विद्‌यार्थी जीवन सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है ।एक आदर्श विद्‌यार्थी वह है जो परिश्रम और लगन से अध्ययन करता है तथा सद्‌गुणों को अपनाकर स्वयं का ही नहीं अपितु अपने माँ-बाप व विद्‌यालय का नाम ऊँचा करता है । वह अपने पीछे ऐसे उदाहरण छोड़ जाता है जो अन्य विद्‌यार्थियों के लिए अनुकरणीय बन जाते हैं ।एक आदर्श विद्‌यार्थी सदैव पुस्तकों को ही अपना सबसे अच्छा मित्र समझता है । वह पूरी लगन और परिश्रम से उन पुस्तकों का अध्ययन करता है जो जीवन निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं । इन उपयोगी पुस्तकों में उसके विषय की पुस्तकों के अतिरिक्त वे पुस्तकें भी हो सकती हैं जिनमें सामान्य ज्ञान आधुनिक जगत की नवीनतम जानकारियाँ तथा अन्य उपयोगी बातें भो होती हैं ।

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi!विद्‌यार्थी जीवन को मनुष्य के जीवन की आधारशिला कहा जाता है । इस समय वह जिन गुणों व अवगुणों को अपनाता है वही आगे चलकर चरित्र का निर्माण करते हैं । अत: विद्‌यार्थी जीवन सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है ।एक आदर्श विद्‌यार्थी वह है जो परिश्रम और लगन से अध्ययन करता है तथा सद्‌गुणों को अपनाकर स्वयं का ही नहीं अपितु अपने माँ-बाप व विद्‌यालय का नाम ऊँचा करता है । वह अपने पीछे ऐसे उदाहरण छोड़ जाता है जो अन्य विद्‌यार्थियों के लिए अनुकरणीय बन जाते हैं ।एक आदर्श विद्‌यार्थी सदैव पुस्तकों को ही अपना सबसे अच्छा मित्र समझता है । वह पूरी लगन और परिश्रम से उन पुस्तकों का अध्ययन करता है जो जीवन निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं । इन उपयोगी पुस्तकों में उसके विषय की पुस्तकों के अतिरिक्त वे पुस्तकें भी हो सकती हैं जिनमें सामान्य ज्ञान आधुनिक जगत की नवीनतम जानकारियाँ तथा अन्य उपयोगी बातें भो होती हैं ।एक आदर्श विद्‌यार्थी सदैव परिश्रम को ही पूरा महत्व देता है । वह परिश्रम को ही सफलता की कुंजी मानता है क्योंकि प्रसिद्‌ध उक्ति है:एक आदर्श विद्‌यार्थी सदैव परिश्रम को ही पूरा महत्व देता है । वह परिश्रम को ही सफलता की कुंजी मानता है क्योंकि प्रसिद्‌ध उक्ति है:

एक आदर्श विद्‌यार्थी सदैव परिश्रम को ही पूरा महत्व देता है । वह परिश्रम को ही सफलता की कुंजी मानता है क्योंकि प्रसिद्‌ध उक्ति है:”उद्‌यमेन ही सिद्‌धयंति कार्याणि न मनोरथे,

एक आदर्श विद्‌यार्थी सदैव परिश्रम को ही पूरा महत्व देता है । वह परिश्रम को ही सफलता की कुंजी मानता है क्योंकि प्रसिद्‌ध उक्ति है:”उद्‌यमेन ही सिद्‌धयंति कार्याणि न मनोरथे,न हि सुप्तस्य सिहंस्य प्रविशंति मुखे मृगा: ।”

एक आदर्श विद्‌यार्थी सदैव परिश्रम को ही पूरा महत्व देता है । वह परिश्रम को ही सफलता की कुंजी मानता है क्योंकि प्रसिद्‌ध उक्ति है:”उद्‌यमेन ही सिद्‌धयंति कार्याणि न मनोरथे,न हि सुप्तस्य सिहंस्य प्रविशंति मुखे मृगा: ।”आदर्श विद्‌यार्थी अपने अध्यापक अथवा गुरुजनों का पूर्ण आदर करता है । वह उनके हर आदेश का पालन करता है । अध्यापक उसे जो भी पढ़ने अथव याद करने के लिए कहते हैं वह उसे ध्यानपूर्वक पढ़ता है ।

कक्षा में जब भी अध्यापक पढ़ाते हैं तब वह उसे ध्यानपूर्वक सुनता है । वह सदैव यह मानकर चलता है कि वह गुरु से ही संपूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकता है । गुरुजनों के अतिरिक्त वह अपने माता-पिता की इच्छाओं एवं निर्देशों के अनुसार ही कार्य करता है ।

कक्षा में जब भी अध्यापक पढ़ाते हैं तब वह उसे ध्यानपूर्वक सुनता है । वह सदैव यह मानकर चलता है कि वह गुरु से ही संपूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकता है । गुरुजनों के अतिरिक्त वह अपने माता-पिता की इच्छाओं एवं निर्देशों के अनुसार ही कार्य करता है ।किसी भी विद्‌यार्थी के लिए पुस्तक ज्ञान आवश्यक है परंतु मात्र पुस्तकों के अध्ययन से ही सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है । अत: एक आदर्श विद्‌यार्थी पढ़ाई के साथ खेल-कूद व अन्य कार्यकलापों को भी उतना ही महत्व देता है । खेल-कूद व व्यायाम आदि भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके बिना शरीर में सुचारू रूप से रक्त संचार संभव नहीं है । इसका सीधा संबंध मस्तिष्क के विकास से है ।

Answered by Srishtirastogi
5

Answer:

Hey mate here is your answer.....

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Explanation:

विद्यार्थी ही किसी देश का भविष्य होते हैं। एक राष्ट्र की प्रगति का आधार उसके विद्यार्थी ही हैं। अगर विद्यार्थी आदर्शवादी होंगे तो देश का भविष्य उज्जवल होगा। आदर्श विद्यार्थी युवा पीढ़ी का पथ प्रशस्त करते हैं।

आदर्श विद्यार्थी वह नहीं है जो कक्षा में बहुत अच्छे अंक लाता है, या नये नये प्रतिमान स्थापित करता है, बल्कि वहीं विद्यार्थी आदर्श कहला सकने का अधिकारी है जो न केवल पढ़ाई में अच्छा है, मगर अच्छा इंसान भी है। जो कर्त्तव्यनिष्ठ और ईमानदार है, सत्यवादी और न्यायप्रिय है।

जो सदैव सभी की सहायता के लिये तत्पर रहता है। पढ़ाई के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में भी गंभीर है।

जो खेलकूद में भी रूचि रखता हो, वाद विवाद की भी योग्यता रखता हो। आदर्श विद्यार्थी में पुरस्कार जीतने के साथ साथ हदय जीतने की क्षमता होना भी जरूरी है।

आदर्श विद्यार्थी का अर्थ है- ऐसा विद्यार्थी जिसका आचरण एवं व्यवहार अन्य विद्यार्थियों के लिये उदाहरण बने। जिसका सोचने का दायरा, जिसकी सोच अपने तक सीमित न हो, जो देश विदेश के बारे में भी ज्ञान रखता हो। और जो एक अच्छा नागरिक और देश प्रेमी हो।

अच्छा विद्यार्थी ही अच्छे नागरिक का पर्याप्त हो सकता है। अच्छा विद्यार्थी आदर्श बालक बालिका वही है जो बड़ों का सम्मान करे और छोटों से स्नेह रखे। जो सभी धर्मों का सम्मान करे और समभाव रखे। अपने देश के कानून और समाज का आदर करे और आत्म उन्नति एवं राष्ट्र उन्नति में सहायक हो।

Hope it helps you!!......

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