अलकायदा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
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अल-क़ायदा (अरबी: القاعدة, अर्थ: 'बुनियाद', 'आधार') एक बहुराष्ट्रीय उग्रवादी सुन्नी इस्लामवादी संगठन है जिसका स्थापना ओसामा बिन लादेन, अब्दुल्लाह आज़म और 1980 के दशक में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियतों के आक्रमण के विरोध करने वाले कुछ अन्य अरब स्वयंसेवकों द्वारा 1988 में किया गया था।
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यह इस्लामी कट्टरपंथी सलाफ़ी जिहादवादियों का जालतंत्र है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो), यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमरीका, यूनाइटेड किंगडम,भारत, रूस और कई अन्य देशों द्वारा यह संगठन एक आतंकवादी समूह क़रार दिया गया है।
अल-क़ायदा ने सबसे पहले आठवें दशक में अपनी स्थापना के बाद चेचेन्या में रूस के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी और उसके बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अल-क़ायदा ने ऐसी लड़ाइयों में भाग लेना शुरु किया, जिसके बारे में उसने आरोप लगाया कि वहाँ मुसलमानों पर अत्याचार हुए हैं। बाद में अल-क़ायदा ने 9-11 के हमले किए और अमरीका को उसने सबसे बड़ा दुश्मन घोषित कर दिया। पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर से बातचीत में इसके संस्थापक ओसामा बिन लादेन ने एकाधिक बार माना कि अमरीका पूरी दुनिया में अपने साम्राज्य के विस्तार के लिये हमले कर रहा है और अल-क़ायदा इसके ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई जारी रखेगा.
अल-क़ायदा ने सबसे पहले आठवें दशक में अपनी स्थापना के बाद चेचेन्या में रूस के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी और उसके बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अल-क़ायदा ने ऐसी लड़ाइयों में भाग लेना शुरु किया, जिसके बारे में उसने आरोप लगाया कि वहाँ मुसलमानों पर अत्याचार हुए हैं। बाद में अल-क़ायदा ने 9-11 के हमले किए और अमरीका को उसने सबसे बड़ा दुश्मन घोषित कर दिया। पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर से बातचीत में इसके संस्थापक ओसामा बिन लादेन ने एकाधिक बार माना कि अमरीका पूरी दुनिया में अपने साम्राज्य के विस्तार के लिये हमले कर रहा है और अल-क़ायदा इसके ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई जारी रखेगा.
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