अपने अध्ययन की अवधि के तहत प्रारंभिक भारत के पुनर्निर्माण के लिए साहित्यिक स्रोतों और उनकी सीमाओं का विश्लेषण करें
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अध्ययन की अवधि और पुनःनिर्माण । Explanation: अध्ययन के बिना किसी भी चीज़ को हम सही तरीके से वास्तविकता का रूप नहीं दे सकते है। इसलिए हमें हर दम प्रयास करते रहना चाहिए की हम अध्ययन करते रहें। वैसे प्राचीन भारत में सामाजिक आधारभूतों में बदलाव केवल और केवल भाषागत बदलावों से संभव था। इसलिए उस सामय होने वाली साहित्यिक रचनाओं में समाज सुधारक गतिविधिओं का अवलोकन हमें मिलता है। साहित्यिक रचनाओं में मुंशी प्रेमचंद का गोदान, महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की कहनानियाँ, मैथिली शरण गुप्त जी की भारत भारती आदि प्रधान है।
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