भाषायां पञ्चवाक्यानि लिखत-(चित्र देखकर संस्कृत भाषा में पाँच
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(मंजषा से उचित पद चनकर क
Answers
मजूषा – ग्रामस्य मध्ये, विंशतिः, कक्षाः, षोडश अध्यापकाः, उद्यानम्, क्रीडाङ्गणम् मध्यान्तरे, क्रीडन्ति, अतीवसुन्दरः।
RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् चित्राधारितं वर्णनम् image 1
उत्तरम्:
1. अयम् विद्यालय: ग्रामस्य मध्ये स्थितः अस्ति। (यह विद्यालय गाँव के बीच में स्थित है।)
2. विद्यालये विंशति कक्षाः सन्ति। (विद्यालय में बीस कमरे हैं।)
3. अस्मिन् विद्यालये षोडश अध्यापकाः सन्ति। (इस विद्यालय में सोलह अध्यापक हैं।)
4. विद्यालये एकम् उद्यानम् अस्ति। (विद्यालय में एक बगीचा है।)
5. मम विद्यालस्य एकम् क्रीडाङ्गणम् अपि अस्ति। (मेरे विद्यालय का एक खेल मैदान भी है।)
6. बालका: मध्यान्तरे क्रीडन्ति। (बालक मध्यावकाश में खेलते हैं।)
7. मम विद्यालय: अतीव सुन्दरः अस्ति। (मेरा विद्यालय अत्यन्त सुन्दर है।)
पश्न 2.
चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषायां प्रदत्तशब्दानां सहायतया’ अस्माकं जीवने वृक्षाणाम् उपयोगिता’ इति विषये सप्तवाक्यानि लिखतु।
(चित्र देखकर मन्जूषा में दिये गये शब्दों की सहायता से हमारे जीवन में वृक्षों की उपयोगिता’ इस विषय पर सात वाक्य लिखिए।)
मञ्जूषा – अस्मिन् युगे, उपयोगिता, प्राणवायु, पर्यावरणं, दृश्यते, फलानि, प्राप्नुम; छाया, काष्ठानि, खगाः, वृक्षाणां कर्तनं नैव।
RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् चित्राधारितं वर्णनम् image 2
उत्तरम्:
1. अस्मिन् युगे वृक्षाणाम् अत्यधिक महत्वं अस्ति। (इस युग में वृक्षों का अत्यधिक महत्व है।)
2. वृक्षाः अस्मभ्यम् प्राणवायुं प्रयच्छन्ति। (वृक्ष हमारे लिए प्राणवायु (आक्सीजन) देते हैं।)
3. वृक्षैः पर्यावरण शुद्धं भवति । (वृक्षों द्वारा पर्यावरण शुद्ध होता है।)
4. वृक्षात् वयं फलानि लभामहे। (वृक्ष से हम सब फल प्राप्त करते हैं।)
5. वृक्षाः अस्मभ्यम् छाया यच्छन्ति। (वृक्ष हमारे लिए छाया देते हैं।)
6. खगाः वृक्षेषु तिष्ठन्ति । (पक्षी वृक्षों पर बैठते हैं।)
7. जना: वृक्षाणां कर्तनं नैव कुर्यः। (मनुष्यों को वृक्ष नहीं काटना चाहिए।)
रचनात्मक कार्यम् चित्राधारितं वर्णनम्
परिचय – ‘चित्राधारितवर्णनम्’ चित्रों के आधार पर लिखा जाने वाला अनुच्छेद या कथांश होता है अर्थात् चित्र-वर्णन में कोई भी सामान्य चित्र देकर उसका वर्णन करने को कहा जाता है । यह वर्णन मंजूषा में दिए गए शब्दों की सहायता से करना होता है । इस प्रकार इस प्रश्न का उत्तर लिखने के लिए शब्दों के वाक्य-प्रयोग का गहन और निरन्तर अभ्यास छात्रों द्वारा किया जाना चाहिए ।
सामान्य निर्देश – चित्र-वर्णन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए
चित्र-वर्णन में एक ही भाव अथवा विचार प्रस्तुत करना चाहिए ।
भूमिका एवं उपसंहार नहीं होना चाहिए ।
विषय का प्रारम्भ शीघ्र ही करना चाहिए ।
वाक्य आपस में सम्बद्ध होने चाहिए ।
विशेषत: वाक्यों में रोचकता होनी चाहिए ।
भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहयुक्त होनी चाहिए ।
वाक्य बहुत बड़े नहीं होने चाहिए ।
वाक्य अधिक छोटे भी नहीं होने चाहिए ।
चित्र का वर्णन मंजूषा में दिए गए शब्दों की सहायता से ही करना चाहिए।
मंजूषा के शब्दों का प्रयोग चित्र के अनुसार ही करना चाहिए।
चित्र को ध्यान में रखकर शब्दों के लिंग, वचन और पुरुष में परिवर्तन किया जा सकता है ।
चित्र-वर्णन में उसका केन्द्रीय भाव अथवा शिक्षा आवश्यकतानुसार प्रारम्भ या अन्त में देना चाहिए ।
यहाँ पर चित्र-वर्णन के कुछ उदाहरण देकर उन्हें हल करके समझाया गया है । इनके गहन अध्ययन के द्वारा ही इनके लेखन में निपुणता प्राप्त की जा सकती है।
पाठ्य-पुस्तक में दिये गये चित्राधारित वर्णन
पश्न 1.
निम्नाङ्कितं चित्रं दृष्ट्वा प्रदत्तसंकेतपदानां साहाय्येन स्वविद्यालयस्य विषये सप्तवाक्यानि लिखतु।
(निम्नांकित चित्र को देखकर दिये गये संकेत पदों की सहायता से अपने विद्यालय के विषय में सात वाक्य लिखिए।)
मजूषा – ग्रामस्य मध्ये, विंशतिः, कक्षाः, षोडश अध्यापकाः, उद्यानम्, क्रीडाङ्गणम् मध्यान्तरे, क्रीडन्ति, अतीवसुन्दरः।
RBSE Class 10 Sanskrit रचनात्मक कार्यम् चित्राधारितं वर्णनम् image 1
उत्तरम्:
1. अयम् विद्यालय: ग्रामस्य मध्ये स्थितः अस्ति। (यह विद्यालय गाँव के बीच में स्थित है।)
2. विद्यालये विंशति कक्षाः सन्ति। (विद्यालय में बीस कमरे हैं।)
3. अस्मिन् विद्यालये षोडश अध्यापकाः सन्ति। (इस विद्यालय में सोलह अध्यापक हैं।)
4. विद्यालये एकम् उद्यानम् अस्ति। (विद्यालय में एक बगीचा है।)
5. मम विद्यालस्य एकम् क्रीडाङ्गणम् अपि अस्ति। (मेरे विद्यालय का एक खेल मैदान भी है।)
6. बालका: मध्यान्तरे क्रीडन्ति। (बालक मध्यावकाश में खेलते हैं।)
7. मम विद्यालय: अतीव सुन्दरः अस्ति। (मेरा विद्यालय अत्यन्त सुन्दर है।)
पश्न 2.
चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषायां प्रदत्तशब्दानां सहायतया’ अस्माकं जीवने वृक्षाणाम् उपयोगिता’ इति विषये सप्तवाक्यानि लिखतु।
(चित्र देखकर मन्जूषा में दिये गये शब्दों की सहायता से हमारे जीवन में वृक्षों की उपयोगिता’ इस विषय पर सात वाक्य लिखिए।)
मञ्जूषा – अस्मिन् युगे, उपयोगिता, प्राणवायु, पर्यावरणं, दृश्यते, फलानि, प्राप्नुम; छाया, काष्ठानि, खगाः, वृक्षाणां कर्तनं नैव।भाषायां पञ्चवाक्यानि लिखत-(चित्र देखकर संस्कृत भाषा में पाँच
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(मंजषा से उचित पद चनकर कपुष्पोत्सव: ' अत्र उचितं संधि विच्छेदनं पदं लिखत ।