Hindi, asked by kl9721144725, 4 months ago

bhart ki तुलना me चीन में tej arthik वृद्धि के piche
कारण बताइन​

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Answered by sunilsharmaguruji
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Answer:

अमरीका के साथ ट्रेड-वॉर से जूझती और घरेलू बाज़ार में कम मांग की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था इस साल की तीसरी तिमाही में उम्मीद से भी कम रफ़्तार पर आ गई है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तीसरी तिमाही में चीन में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर 6 प्रतिशत दर्ज की गई है.

ध्यान देने वाली बात ये है कि ये गिरावट अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों के बावजूद दर्ज की गई है. इनमें टैक्स में कटौती जैसे उपाये शामिल हैं.

ताज़ा आंकड़ें ये बता रहे हैं कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने पिछले तीन दशकों के मुकाबले अपनी रफ़्तार फ़िलहाल खो दी है.

चीन की अर्थव्यवस्था में आने वाले उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के हिसाब से ख़ासा महत्व रखते हैं.

Answered by Rajputyogi
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Answer:

2008 में 21वीं सदी का पहला आर्थिक संकट आया था, अमरीका में घर ख़रीदने के लिए सस्ते कर्ज़ या मॉर्टगेज देकर बैंक और वित्तीय संस्थान फँस गए.

संकट अपने चरम पर पहुँचा 15 सितंबर 2008 को, जब एक बड़ा अमरीकी बैंक लीमैन ब्रदर्स दिवालिया हो गया, फिर दुनिया की आर्थिक सेहत का प्रतीक समझे जानेवाला अमरीकी शेयर सूचकांक डाउ जोंस ने साढ़े चार फ़ीसदी का गोता लगाया, और वहाँ से उपजी लहर ने देखते-देखते सारी दुनिया के बाज़ारों में उथल-पुथल ला दी. सारी दुनिया वैश्विक मंदी की चपेट में आ गई.

लेकिन जैसे हर आपदा में एक अवसर की भी संभावना होती है, 2008 की मंदी भी एशिया के दो देशों के लिए एक अवसर साबित हुई, भारत और चीन की आर्थिक तरक्की की कहानी पहले से ही चर्चा में थी, मंदी ने उस कहानी पर विश्वसनीयता की मुहर लगा दी.

सारी दुनिया में भारत और चीन का नाम गूँज उठा, कहा जाने लगा कि दुनिया को अगर आर्थिक मंदी के दौर से कोई निकाल सकता है तो उनमें सबसे आगे चीन और भारत होंगे.

और उसकी वजह भी थी. मंदी के अगले साल, यानी 2009 में दुनिया की कुल जीडीपी में 75 फ़ीसदी से ज़्यादा का योगदान करने वाले 19 देशों में से केवल पाँच देशों की जीडीपी बढ़ी. उनमें सबसे ऊपर था चीन, दूसरे नंबर पर था भारत.

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