गंदगी मुक्त मेरा गाँव पर निबंध लिखे |
250-300 Words Mai
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Answers
उत्तर
आज हमारा देश दिन ब दिन तरक्की कर रहा है, नए भविष्य की संरचना हो रही है, जिसमें आधुनिक परिवहन, उद्योग, इत्यादि का विकास हो रहा है।
देखते ही देखते जंगल उद्योगों में परिवर्तित हो गए। जिस रफ्तार से जंगल खत्म हुए उसी रफ्तार से प्रदूषण भी भढने लगा मानो की नयी तकनीक आने के बाद मनुष्य प्रकृति के बारे मे भूल ही गया हो।
हमारे गाँव मे भी गंदगी का बड़ा भंडार एकत्रित होगया था , और देखने को सड़क कम कूडे दान जेसा प्रतीत होने लगा, पर फिर पंचायत हुई उसके बाद गंदगी फेलाने पर रोक लगाने के लिए कड़े नियम बनाये गये, और कपड़ा फैक्टरी से निकलने वाले केमिकल को रोका गया।
वृक्ष लगाए गए ताकि हरियाली बनी रहे | पानी की स्वच्छता को बनाये रखने के लिये, कपडा उद्योग से निकलने वाले केमिकल को रोका गया ताकि खेतों मे हो रहीं फसल को स्वच्छ पानी से सीचा जा सके। राज्य सरकार ने बायोगैस का निर्माण किया ताकी पेड़ो को बचाया जा सके, और जैव उर्वरक का निर्माण हो सके।
आज हमारा गाँव स्वच्छ है। मनुष्य को कभी प्रकृति को हानी नहीं पहुंचानी चाहिए, प्राकृतिक सम्प्रदाय भगवान की दिय गई वो अमूल्य चीज़ हे जिसकी हमे सुरक्षा करनी चाहिए।
मेरा गांव देखा जाए तो कुछ साल पहले गंदगी मुक्त नहीं था| लेकिन इसमें गांव की भी कोई गलती नहीं है क्योंकि उन्हें यह समझाने वाला भी कोई नहीं था कि गंदगी के दुश परिणाम क्या हो सकते है| गंदगी को देखा जाए तो वह लकड़ी में लगे उस दीमक की तरह है जो लकड़ी को पल पल बर्बाद कर रहा है| ठीक उसी प्रकार गंदगी मेरे गांव को तबाह कर रही थी| लेकिन जब कोई समझदार किसी के बीच आता है तो वह अपनी समझदारी सब के बीच फैलने लगता है| ठीक उसी प्रकार हमारे गांव के मुखिया ने यह इस बात की अहमियत समझी| और पूरे गांव को समझाए कि गंदगी को हटाना एक मात्र उपाय है जिससे हम पूरे गांव को विकसित कर सकते है| लोगो को समझना आसान नहीं होता है लेकिन नामुमकिन भी नहीं होता है| लोगो ने सफाई की अहमियत समझी और गंदगी को अपने गांव से बाहर निकालने का प्रण लिया|
गांव को साफ तो करने का प्रण ले लिया था लेकिन पूरा गांव काबर से जायदा कुछ नहीं लग रहा था| जहां देखो वहां पान की पीक परी मिलेगी| अगर वह नह मिले तो गोबर तो संभतः मिल ही जाएगा| कुआ का नज़ारा तो और दर्शनीय था| हर जगह सिर्फ कीचड़| मानो आपको कुएं के पास जाना हो तो एक भयानक दलदल पार करके जाना होगा| सबसे बुरा वक्त तो तब था जब आप खेत में चले जाओ| लोग चाहे जितने भी विकसित क्यों ना हो जाए पर वह घर के सौचलाए को छोड़ खेत में जाना ही पसंद करते है|
इसको साफ करने के लिए पूरे गांव को खूब मेहनत करनी पड़ी| सारी सर्के साफ की गई| अब पीक कहीं जाके काम हुई| बैल और बकरियों को लगाम दी गई| कुएं को पहले साफ किया गया फिर कीचड़ हटाई गई फिर कुएं के पास जाने वाली जगह पर नई मिट्टी दाली गई| और आखरी और सबसे मुश्किल काम लोगो को खेतो में सौच करने से रोकना| लगता है इसकी भनक मुखिया को पहले ही लग गई थी कि लोग यह काम करना नहीं रोकेंगे| इसलिए उन्होंने इस काम के प्रति दंड रख दिया|
बहुत मेहनत के बाद आज मेरा गांव साफ है| गंदगी मुक्त है| और विकास की तरफ अग्रसर है|