Hindi, asked by rakeshkumar1282, 10 days ago

गजाधर बाबू के सभी संतानों के नाम लिखिए​

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Answered by SarthaknKasode
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गजाधर बाबू ने कमरे में जमा सामान पर एक नज़र दौड़ाई – दो बक्स¸ डोलची¸ बालटी ; “यह डिब्बा कैसा है¸ गनेशी ” उन्होंने पूछा।

गनेशी बिस्तर बांधता हुआ¸ कुछ गर्व¸ कुछ दु:ख¸कुछ लज्जासे बोला¸” घरवाली ने साथ को कुछ बेसन के लड्‌डू रख दिये हैं।

कहा¸ बाबूजी को पसन्द थे¸ अब कहां हम गरीब लोग आपकी कुछ खातिर कर पाएंगे।” घर जाने की खुशी में भी गजाधर बाबू ने एक विषाद का अनुभव किया जैसे एक परिचित¸ स्नेह¸ आदरमय¸ सहज संसार से उनका नाता टूट रहा था।

“कभी–कभी हम लोगों की भी खबर लेते रहिएगा।” गनेशी बिस्तर में रस्सी बांधते हुआ बोला।

“कभी कुछ जरूरत हो तो लिखना गनेशी! इस अगहन तक बिटिया की शादी कर दो।”

गनेशी ने अंगोछे के छोर से आंखे पोछी¸ “अब आप लोग सहारा न देंगे तो कौन देगा! आप यहां रहते तो शादी में कुछ हौसला रहता।”

गजाधर बाबू चलने को तैयार बैठे थे। रेल्वे क्वार्टर का वह कमरा¸ जिसमें उन्होंने कितने वर्ष बिताए थे¸ उनका सामान हट जाने से कुरूप और नग्न लग रहा था। आंगन में रोपे पौधे भी जान पहचान के लोग ले गए थे और जगह–जगह मिट्टी बिखरी हुई थी। पर पत्नी¸ बाल–बच्चों के साथ रहने की कल्पना में यह बिछोह एक दुर्बल लहर की तरह उठ कर विलीन हो गया।

गजाधर बाबू खुश थे¸ बहुत खुश। पैंतीस साल की नोकरी के बाद वह रिटायर हो कर जा रहे थे। इन वर्षों में अधिकांश समय उन्होंने अकेले रह कर काटा था। उन अकेले क्षणों में उन्होंने इसी समय की कल्पना की थी¸ जब वह अपने परिवार के साथ रह सकेंगे। इसी आशा के सहारे वह अपने अभाव का बोझ ढो रहे थे। संसार की दृष्टि से उनका जीवन सफल कहा जा सकता था। उन्होंंने शहर में एक मकान बनवा लिया था¸ बड़े लड़के अमर और लडकी कान्ति की शादियां कर दी थीं¸ दो बच्चे ऊंची कक्षाओं में पढ़ रहे थे। गजाधर बाबू नौकरी के कारण प्राय: छोटे स्टेशनों पर रहे और उनके बच्चे तथा पत्नी शहर में¸ जिससे पढ़ाई में बाधा न हो। गजाधर बाबू स्वभाव से बहुत स्नेही व्यक्ति थे और स्नेह के आकांक्षी भी। जब परिवार साथ था¸ डयूटी से लौट कर बच्चों से हंसते–खेलते¸ पत्नी से कुछ मनोविनोद करते – उन सबके चले जाने से उनके जीवन में गहन सूनापन भर उठा। खाली क्षणों में उनसे घरमें टिका न जाता।

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