हिंदी पत्र का सुलेख
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Hindi Patra Lekhan (हिन्दी पत्र लेखन)– किसी भी कागज या अन्य किसी चीज पर लिखा गया कोई भी समाचार पत्र कहलाता है। प्राचीन काल में खबरों का और एक दुसरे का कुशल मंगल जानने का एकमात्र साधन पत्र ही थे जिनसे जानकारी मिलने में बहुत समय लगता था। आज के तकनीकी युग में पत्रों का स्थान टेलीफॉन ,टैलिग्राम,फैक्स आदि ने ले लिया है और पत्रों का चलन खत्म हो गया है हालांकि अभी भी व्यवसाय,बैंक और सरकारी कार्यालयों आदि में पत्रों का प्रयोग किया जाता है। पत्र को अंग्रेजी में लैटर कहा जाता है।
पत्र लेखन के प्रकार (Types of Letters in Hindi)
हम अलग अलग लोगों को पत्र लिखते है और उसी के आधार पर पत्रों को विभाजित किया गया है–
1. औपचारिक पत्र
2.अनौपचारिक पत्र
औपचारिक पत्र (Aupcharik Patra in Hindi)– यह वह पत्र होते है जो हम किसी सरकारी, अर्धसरकारी, व्यवसाय आदि से जुड़े लोगो को लिखते है। इनकी भाषाशैली औपचारिक होती है और इनका स्वरूप भी निश्चित साँचे में ढला होता है। इसके अंतर्गत किसी सरकारी या गैर सरकारी विभाग को शिकायत पत्र,निमंत्रण पत्र, सुझाव पत्र आदि आते है।
अनौपचारिक पत्र (Anaupcharik Patra in Hindi)– यह पत्र उन लोगों को लिखे जाते है जिनसे हमारा घनिष्ठ संबंध होता है। यह परिवार वालों, रिश्तेदारों और मित्रों आदि को लिखे जाते है। इनकी भाषा बहुत ही सामान्य होती है। इन पत्रों को व्यक्तिगत पत्र भी कहा जाता है और इनका विषय भी निजी और घरेलू ही होता है।
पत्र के अंग- पत्र चाहे औपचारिक हो या अनौपचारिक दोनों के ही बहुत से अंग होते है-
1. पता तथा दिनांक
2.संबोधन और अभिवादन शब्दावली का प्रयोग
3. विषय सामग्री
4.पत्र समाप्ति,स्वनिर्देश और हस्ताक्षर
1. पता तथा दिनाक- पत्र के आरंभ में बाई और पर पत्र लिखने वाले का पता लिखा जाता है और उसके नीचे दिनांक लिखते है। औपचारिक पत्रों में दिनांक के नीचे जिसको पत्र भेज रहे है उनका भी पता लिखा जाता है।
2. संबोधन और अभिवादन शब्दावली- अपनी बातें लिखने से पहले हमें सामने वाले को किसी न किसी शब्द से संबोधित करना होता है। अनौपचारिक पत्रों में पूज्य ,नमस्कार आदि शब्द अपने से बड़ो के लिए प्रयोग किए जाते है और छोटो के लिए स्नेह,प्रिय आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है और इन संबोधन शब्दों के अंत में अल्प विराम लगाया जाता है। अनौपचारिक पत्रो में संबोधन के लिए महोदय ,मान्यवर आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है और संबोधन से पहले अपना विषय बताते है जिसके बारें में आपका पत्र है।
3. विषय सामग्री- इसमें हम अपने भाव और विचार लिखते है जो कि हम इस पत्र के माध्यम से व्यक्त करना चाहते है। हमारी लिखने की भाषा स्पष्ट और सरल होनी चाहिए।
4. पत्र समाप्ति और हस्ताक्षर- पत्र की समाप्ति सामने वाले की उमर और पद के अनुसार होती है। अगर हमसे बड़े है तो आपका आघ्याकारी, आपका विशवसनीय आदि शब्दों का प्रयोग कर सकते है और अगर छोटे का पत्र लिखा है तो तुम्हारा प्यारा जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। अंत में नाम और हस्ताक्षर किए जाते है।
Hindi Letter Format
कुछ औपचारिक और अनौपचारिक पत्र लेखन उदाहरण (पत्र लेखन नमूना) Letter Writing in Hindi-
#Informal Letter in Hindi Format
1. निजी पत्र-
हाउस नंबर– 177
सैक्टर 36 ए,
चण्डीगढ़।
22 मई, 2018
प्रिय मित्र,
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तुम्हारा मित्र
नाम ।
2. प्रार्थना पत्र-
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय
पब्लिक स्कूल,
चण्डीगढ़।
दिनांक- 22 मई, 2018
विषय- बिमारी के कारण दो दिन के अवकाश हेतु
मान्यवर
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धन्यवाद ।
आपका आग्याकारी शिष्य
नाम
कक्षा
3. व्यवसायिक पत्र-
सेवा में,
मैनेजिंग महोदय,
गोयल फैसन हाउस,
नई दिल्ली।
दिनांक- 22 मई, 2018
विषय– समान मंगवाने हेतु
मान्यवर
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धन्यवाद।
नाम
राषट्रपति भवन,
110067
नई दिल्ली।
4. सरकारी पत्र-
सेवा में,
श्रीमान् मुख्य सचीव,
नगरपालिका,
असंध।
दिनांक– 22 मई, 2018
विषय– शहर में साफ सफाई करवाने हेतु
मान्यवर
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धन्यवाद।
नाम
गीता कॉलोनी,
असंध।
पत्र लिखते समय सावधानियाँ- आप का पत्र शिष्टतापूर्ण होना चाहिए। आपकी भाषा साफ और स्पष्ट होनी चाहिए जिससे कि पत्र के माध्यम से आप जो भाव व्यक्त करना चाहते हो वो सामने वाले को आसानी से समझ में आ सके। औपचारिक पत्रों की भाषा अच्छी होनी चाहिए और निश्चित रूप से होनी चाहिए।
पत्रों का हमारे जीवन का एक अहम स्थान है। हमारे सभी सरकारी कार्यों में पत्रों का ही प्रयोग होता है क्योंकि यह हस्ताक्षर के साथ पक्के दस्तावेज होते है। हर किसी को अपनी जिंदगी में कभी न कभी पत्र तो लिखना ही पढ़ता है। पत्र हमें बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बात व्यक्त करने का मौका देते है। हम सब को पत्र लेखन आना ही चाहिए।
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