हमको लिखा हुआ है कहां गोपियां यह प्रश्न किसने पूछ रही है
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Explanation:
दाख छुहारी छांड़ि अमृत फल, बिषकीरा बिष खात॥
ज्यों चकोर कों देई कपूर कोउ, तजि अंगार अघात।
मधुप करत घर फोरि काठ मैं, बंधत कमल के पात॥
ज्य पतंग हित जानि आपनो, दीपक सौं लपटात।
सूरदास जाको मन जासौ , सोई ताहि सुहात॥
शब्दार्थ-ऊधौ = उद्धव, कृष्ण के मित्र जो गोपियों को समझाने आए थे। मन माने = मन को अच्छा लगना। दाख = अंगूर। छुहारा = एक प्रकार का मेवा। बिष = जहर। बिषकीरा = एक ऐसा कीड़ा जो विष खाता है। चकोर = एक पक्षी जिसका अंगारे खाना प्रिय माना गया है। मधुप = भौंरा। फोरि = छेद करके। काठ = लकड़ी। पति = बंधने, कमल के फूल का संपुट। पतंग = दीपक के पास मँडराने वाला और लौ में जल जाने वाला कीट। लपटात = लिपटता है। सोई = वही। सुहात = सुहाता है, प्रिय लगता है।
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