इतने ऊंचे उठोइतने ऊंचे उठो के शब्दार्थ
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कविता 'इतने ऊँचे उठो' का सप्रसंग भावार्थ
इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है। देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से ...
नये हाथ से, वर्तमान का रूप सँवारो नयी तूलिका से चित्रों के रंग उभारो ...
लो अतीत से उतना ही जितना पोषक है जीर्ण-शीर्ण का मोह मृत्यु का ही द्योतक है ...
चाह रहे हम इस धरती को स्वर्ग बनाना
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