| इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है।
देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से
सिंचित करो धरा, समता की भाव-वृष्टि से
जाति-भेद की, धर्म-देश की
काले-गोरे, राग-द्वेष की ।
ज्वालाओं से जलते जग में
इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है।
Answers
Answered by
5
Answer:
wow very good poem
Explanation:
very very very very very very very very very very good good good good poem
Similar questions