जल से सम्भन्धित स्वरचित कविता।
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कल का जल
जल ही जीवन जल सा जीवन, जल्दी ही जल जाओगे, अगर न बची जल की बूंदें, कैसे प्यास बुझाओगे। नाती-पोते खड़े रहेंगे जल, राशन की कतारों में, पानी पर से बिछेंगी लाशें, लाखों और हजारों में। रिश्ते-नाते पीछे होंगे, जल की होगी मारामारी, रुपयों में भी जल न मिलेगा, जल की होगी पहरेदारी। हनन करेंगे शक्तिशाली, नदियों के अधिकारों का, सारे जल पर कब्जा होगा, बाहुबली मक्कारों का।
जल ही जीवन जल सा जीवन, जल्दी ही जल जाओगे, अगर न बची जल की बूंदें, कैसे प्यास बुझाओगे। नाती-पोते खड़े रहेंगे जल, राशन की कतारों में, पानी पर से बिछेंगी लाशें, लाखों और हजारों में। रिश्ते-नाते पीछे होंगे, जल की होगी मारामारी, रुपयों में भी जल न मिलेगा, जल की होगी पहरेदारी। हनन करेंगे शक्तिशाली, नदियों के अधिकारों का, सारे जल पर कब्जा होगा, बाहुबली मक्कारों का।
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