(क) हँसियाकार रुधिराणु एनिमिया पर टिप्पणी लिखिए।
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हंसिया-कोशिका रोग के संबंध में मानव जीनोम पर मलेरिया के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इस रोग में हीमोग्लोबिन के बीटा-ग्लोबिन खंड को बनाने वाली जीन एच.बी.बी. में उत्परिवर्तन हो जाता है। सामान्यतः बीटा ग्लोबिन प्रोटीन के छठे स्थान पर एक ग्लूटामेट अमीनो अम्ल होता है, जबकि हंसिया-कोशिका रोग में इसकी जगह वैलीन अम्ल आ जाता है। इस बदलाव से एक जलसह अमीनो अम्ल के स्थान पर जल-विरोधी अम्ल आ जाता है, जिससे हीमोग्लोबिन के अणु परस्पर बंध जाने को प्रोत्साहित होते हैं। हीमोग्लोबिन अणुओं की लड़ियाँ बन जाने से विकृत लाल रक्त कोशिका हंसिया का आकार ग्रहण कर लेती हैं। इस तरह से विकृत हुई रक्त कोशिकाएँ, मुख्यतः तिल्ली में, रक्त से हटा ली जाती हैं और विनष्ट कर दी जाती हैं।
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हँसियाकार रुधिराणु एनिमिया पर टिप्पणी लिखिए।
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