(क) राम द्वारा धनुष तोड़ा गया। (कर्तृवाच्य में बदलिए)
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(क) राम द्वारा धनुष तोड़ा गया। (कर्तृवाच्य में बदलिए)
(क) राम द्वारा धनुष तोड़ा गया।
कर्तृवाच्य : राम ने धनुष तोड़ा।
व्याख्या :
वाच्यों के तीन भेद होते हैं
- कर्तृवाच्य
- कर्मवाच्य
- भाववाच्य
कर्तवाच्य’ : किसी वाक्य में वाच्य का वह रूप जिसमें जिसमें लिंग एवं वचन कर्ता के अनुसार होते हैं उन्हें ‘कर्तवाच्य’ कहते हैं।
कर्मवाच्य’ : वाच्य का वह रूप जिसमें लिंग एवं वचन कर्ता के ना अनुसार ना होकर कर्म के अनुसार हो उन्हें ‘कर्मवाच्य’ कहते हैं।
‘भाववाच्य’ में भावों की प्रधानता होती है और इसमें ना तो कर्ता की प्रधानता होती है, और ना ही कर्म बल्क अकर्मक क्रिया का प्रयोग होकर भाव ही प्रधान होता है |
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