(ख) 'विनम्रता की हरियाली को ओढ़े-से कवि का क्या तात्पर्य है?
(ग) 'अनहोनी को भाँप उठा'- यहाँ कवि किस अनहोनी की बात कर रहा है?
महीं लिया)
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(ख) 'विनम्रता की हरियाली को ओढ़े से कवि का तात्पर्य है कि कितनी ऋतुएं आते जाते है पर पेड़ यह सब सहता है और लोहे के खंबे की तरह अपने पर अड़ा रहता है।
(ग) अनहोनी को भाप उठा कहकर कवि यह कह रहा है कि पेड़ को अपने झूठा
श्रेय सुनकर चुप ना रह सका।
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