krodhagni ka samas vigrah
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क्रोधाग्नि का समास विग्रह :
क्रोधाग्नि : क्रोध रूपी अग्नि
क्रोधाग्नि में कर्मधारय समास होता है |
कर्मधारय समास= कर्मधारय समास में व्यक्ति, वस्तु आदि की विशेषता का बोध होता है |इसका उत्तरपद प्रधान होता है | विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच में ‘के समान’ , ‘है जो’ , ‘रूपी’ में से किसी एक शब्द का प्रयोग होता है |
समास विग्रह = सामासिक शब्दों के बीच के संबंध को स्पष्ट करना समास-विग्रह कहलाता है। विग्रह के बाद सामासिक शब्द गायब हो जाते हैं अथार्त जब समस्त पद के सभी पद को अलग – अलग करते हैं उसे समास- विग्रह कहते है।
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yeh konsi zuban hai plz tell me
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