‘लाल पान की बेगम’ कहानी का सारांश लिखें।
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‘लाल पान बाग की बेगम’ कहानी हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार लेखक ‘फणीश्वर नाथ रेणु’ द्वारा लिखी गई है। यह कहानी स्त्री सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत करती है। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने यह बताने की कोशिश की है कि एक स्त्री भी अपने जीवन को अपने इच्छा और अपनी शर्तों पर जीना चाहती है। स्त्री भी आत्मसम्मान चाहती है। ऐसी कोई भी कुप्रथा या कुरीति स्त्री को स्वीकार्य नहीं है जो उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए या उसे दोयम दर्जे का करार दे।
इस कहानी की नायिका बिरजू की मां एक सशक्त महिला है वह आत्मसम्मानी और स्वाभिमानी है। उसके अनेक सपने हैं, इच्छाएं हैं, वो पूरी दुनिया को अपने नजरिए से देखती है। वो कहती है कि उसके पति ने पूरा जीवन कठिन परिश्रम करके गुजार दिया लेकिन कभी भी दो पल खुशी के नही दिये। उसकी पति अर्थात बिरजू का पिता एक दब्बू किस्म का व्यक्ति है। जो हमेशा अपनी इच्छाओं का गला बोलता रहता है। उसका व्यक्तित्व सीधा-सादा जो किसी तरह मजदूरी कर अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहा है। जबकि उसकी पत्नी अर्थात बिरजू की मां एक आधुनिक और प्रगतिशील विचारों वाली महिलाएं जो समाज और परिवार में एक संतुलन बनाते हुए सबको साथ लेकर चलने वाली महिला है। वो हर किसी के सहयोग के लिए तत्पर रहती है। जो उसके विचारों का विरोध करते थे वो उनकी मदद करने से भी पीछे नहीं करती है। यह उसके उदार स्वभाव का परिचायक है।
Explanation:
लाल पान की बेगम शीर्षक कहानी में चंपिया कितने साल की है