मत बाँटो इंसान को का भाव अर्थ पूरे कविता का ?
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विनय महाजन. मंदिर-मस्जिद-गिरजाघर ने बाँट लिया भगवान को। धरती बाँटी, सागर बाँटा मत बाँटो इंसानको।। अभी राह तो शुरू हुई है- मंजिल बैठी दूर है। उजियाला महलों में बंदी- हर दीपक मजबूर है।। मिला न सूरज का सँदेसा - हर घाटी मैदान को। धरती बाँटी, सागर बाँटा मत बाँटो इसान को।। अब भी हरी भरी धरती है- ऊपर नील वितान है। पर न प्यार हो तो जग सूना- जलता रेगिस्तान है।। अभी प्यार का जल देना है- हर प्यासी चट्टान को। धरती बाँटी, सागर बाँटा- मत बाँटो इंसान को।। साथ उठें सब तो पहरा हो- सूरज का हर
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summary mat bato insaan ko
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