नागरी लिप कब एक सार्वदेशिक लिपि थी ?
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नागरी लिपि से ही देवनागरी, नंदिनागरी आदि लिपियों का विकास हुआ है। इसका पहले प्राकृत और संस्कृत भाषा को लिखने में उपयोग किया जाता था। कई बार 'नागरी लिपि' का अर्थ 'देवनागरी लिपि' भी लगाया जाता है।
नागरी लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। कुछ अनुसन्धानों से पता चला कि नागरी लिपि का विकास प्राचीन भारत में पहली से चौथी शताब्दी में गुजरात में हुआ था। सातवीं शताब्दी में यह लिपि आमतौर पर उपयोग की जाती थी और कई शताब्दियों के पश्चात इसके स्थान पर देवनागरी और नंदिनागरी का उपयोग होने लगा।
उत्तर :
8वीं-11वीं शताब्दी के बीच नागरी लिपि पूरे भारत देश में फैली हुई थी। इस कारण उस समय यह एक सार्वदेशिक लिपि के रूप में भी।
व्याख्या :
सार्वदेशिक का अर्थ होता है जो पूरे देश से संबद्ध हो अर्थात् पूरे देश में फैला हो। 8वीं-11वीं शताब्दी में नागरी लिपि पूरे आर्यावर्त में लिपि के रूप में प्रयुक्त होती थी। इसके पश्चात धीरे धीरे नई भाषाओं का विकास हुआ। इन नवीन विकसित भाषाओं को लिखित रूप में निर्धारित करने के लिए नई लिपियों का भी जन्म हुआ।
जैसे पंजाबी भाषा पैशाची व लहंदा से जन्मी है जिनकी प्रारंभिक लिपि देवनागरी थी परंतु कालांतर में यह गुरुमुखी के तौर पर परिवर्तित हो गई।
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