निम्नलिखित शब्दों के दो-दो अर्थ लिखिए-
(क) मंगल
(ख) सुरभि
(ग) घट
(घ) सुधा
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मंगनी – वाग्दान, फलदान, सगाई।
घाटा – हानि, नुकसान, टोटा
सब – अखिल, सम्पूर्ण, सकल, सर्व, समस्त, समग्र, निखिल।
संकल्प – वृत, दृढ़ निश्चय, प्रतिज्ञा, प्रण।
संग्रह – संकलन, संचय, जमावा
संन्यासी – बैरागी, दंडी, विरत, परिव्राजका
सजग – सतर्क, चौकस, चौकन्ना, सावधान।
संहार – अन्त, नाश, समाप्ति, ध्वंसा
समसामयिक – समकालिक, समकालीन, समवयस्क, वर्तमान।
समीक्षा – विवेचना, मीमांसा, आलोचना, निरूपण।
समुद्र – नदीश, वारीश, रत्नाकर, उदधि, पारावार।
सखी – सहेली, सहचरी, सैरंध्री।
सज्जन – भद्र, साधु, पुंगव, सभ्य, कुलीन।
संसार – विश्व, दुनिया, जग, जगत्, इहलोक।
समाप्ति – इतिश्री, इति, अंत, समापन।
सार – रस, सत्त, निचोड़, सत्त्व।
स्तन – पयोधर, छाती, कुच, उरस, उरोज।
सुन्दरी – ललिता, सुनेत्रा, सुनयना, विलासिनी, कामिनी।
सूची – अनुक्रम, अनुक्रमणिका, तालिका, फेहरिस्त, सारणी।
स्वर्ण – सुवर्ण, सोना, कनक, हिरण्य, हेम।
स्वर्ग – सुरलोक, धुलोक, बैकुंठ, परलोक, दिव।
स्वच्छन्द – निरंकुश, स्वतन्त्र, निबंध।
स्वावलम्बन – आत्माश्रय, आत्मनिर्भरता, स्वाश्रय।
स्नेह – प्रेम, प्रीति, अनुराग, प्यार, मोहब्बत, इश्क।
समुद्र – सागर, रत्नाकर, पयोधि, नदीश, सिन्धु, जलधि, पारावार, वारीश, अर्णव, अब्धि।
सरस्वती – भारती, शारदा, वीणापाणि, गिरा, वाणी, महाश्वेता, श्री, भाष, वाक्, हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी।
सूर्य – सूरज, दिनकर, दिवाकर, भास्कर, रवि, नारायण, सविता, कमलबन्धु, आदित्य, प्रभाकर, मार्तण्ड।
सम्पूर्ण – पूर्ण, समग्र, सारा, पूरा, मुकम्मल।
सर्प – भुजंग, अहि, विषधर, व्याल, फणी, उरग, साँप, नाग, अहि।
सुरपुर – सुलोक, स्वर्गलोक, हरिधाम, अमरपुर, देवराज्य, स्वर्ग।
सेठ – महाजन, सूदखोर, साहूकार, ब्याजजीवी, पूँजीपति, मालदार, धनवान, धनी, ताल्लुकदार।
संध्या – निशारंभ, दिनावसान, दिनांत, सायंकाल, गोधूलि, साँझ।
स्तुति – प्रार्थना, पूजा, आराधना, अर्चना।