प्र०1:- *गद्यांश वही प्रोफेसर मनमोहन वर्मा आगे चलकर जम्मू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे ,गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भी रहे। कहने का तात्पर्य यह है कि मेरे छोटे भाई का नाम वही चला जो ताई साहिबा ने दिया। उनके यहां भी हिंदी चलती थी, उर्दू भी चलती थी। अपने घर में वे अवधि बोलते थे ।वातावरण ऐसा था उस समय कि अब हम लोग बहुत निकट थे ।आज की स्थिति देखकर लगता है, जैसे वह सपना ही था ।आज वह सपना खो गया। (1)प्रोफेसर मनमोहन वर्मा कौन थे? (2) लेखिका का किस धर्म के परिवार से संबंध था और क्यों? (3) लेखिका को आज की स्थिति उस समय से अलग क्यों लगती है? (4) पाठ और पाठ के लेखक का नाम बताएं
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1 जम्मू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर
3 वातावरण ऐसा था उस समय कि अब हम लोग बहुत निकट थे ।आज की स्थिति देखकर लगता है, जैसे वह सपना ही था ।आज वह सपना खो गया।
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