प्राचीन काल में दिशाओं का पता कैसे लगाया जाता था ?
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प्राचीन काल में लोग दिशा ज्ञान के लिए ध्रुव तारे को आधार मानते थे जो वैज्ञानिक रूप से भी यह सही लगता है। ध्रुव तारा ठीक उत्तर में हैं और इसका नाम ध्रुव इसलिए है कि यह अडिग है, स्थिर है, इसमें विचलन नहीं है।
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शिव मंदिर के द्वारा
शिव लिंगम का पनारा पानी बहने का शिरा सदैव उत्तर दिशा में होता है।
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