Hindi, asked by rapmonster84, 1 year ago

प्रदुषण का निबंध 150 शब्द

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Answered by rajxalte
75
प्रदूषण आज की दुनिया की एक गंभीर समस्या है । प्रकृति और पर्यावरण के प्रेमियों के लिए यह भारी चिंता का विषय बन गया है । इसकी चपेट में मानव-समुदाय ही नहीं, समस्त जीव-समुदाय आ गया है । इसके दुष्प्रभाव चारों ओर दिखाई दे रहे हैं ।

प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है-गंदगी । वह गंदगी जो हमारे चारों ओर फैल गई है और जिसकी गिरफ्त में पृथ्वी के सभी निवासी हैं उसे प्रदूषण कहा जाता है । प्रदूषण को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण । ये तीनों ही प्रकार के प्रदूषण मानव के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं।

वायु और जल प्रकृति-प्रदत्त जीवनदायी वस्तुएँ हैं । जीवों की उत्पत्ति और जीवन को बनाए रखने में इन दोनों वस्तुओं का बहुत बड़ा हाथ है । वायु में जहाँ सभी जीवधारी साँस लेते हैं वहीं जल को पीने के काम में लाते हैं । लेकिन ये दोनों ही वस्तुएं आजकल बहुत गंदी हो गई हैं ।

वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण इसमें अनेक प्रकार की अशुद्ध गैसों का मिल जाना है । वायु में मानवीय गतिविधियों के कारण कार्बन डायऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे प्रदूषित तत्व भारी मात्रा में मिलते जा रहे हैं । जल में नगरों का कूड़ा-कचरा रासायनिक पदार्थों से युक्त गंदा पानी प्रवाहित किया जाता रहा है । इससे जल के भंडार; जैसे-तालाब, नदियाँ,झीलें और समुद्र का जल निरंतर प्रदूषित हो रहा है ।

ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है – बढ़ती आबादी के कारण निरंतर होनेवाला शोरगुल । घर के बरतनों की खट-पट, मशीनों की खट-पट और वाद्‌य-यंत्रों की झन-झन दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है । वाहनों का शोर, उपकरणों की चीख और चारों दिशाओं से आनेवाली विभिन्न प्रकार की आवाजें ध्वनि प्रदूषण को जन्म दे रही हैं । महानगरों में तो ध्वनि-प्रदूषण अपनी ऊँचाई पर है ।

source = essayinhindi
Answered by hemantsuts012
3

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Concept:

निबन्ध गद्य लेखन की एक विधा है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग किसी विषय की तार्किक और बौद्धिक विवेचना करने वाले लेखों के लिए भी किया जाता है। निबंध के पर्याय रूप में सन्दर्भ, रचना और प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जाता है। लेकिन साहित्यिक आलोचना में सर्वाधिक प्रचलित शब्द निबंध ही है।

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प्रदुषण का निबंध 150 शब्द

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प्रदुषण का निबंध 150 शब्द

Explanation:

प्रदूषण का अभिप्राय है कि हमारी पारिस्थितिकी में कोई भी अवांछित, हानिकारक, अशुद्ध, गंदा तत्व (प्रदूषक) का मिल जाना । प्रदूषण शब्द आजकल इतना आम हो गया है कि हर कोई, यहां तक कि एक छोटा बच्चा भी इस शब्द से अवगत है। स्वस्थ पारिस्थितिकी और पर्यावरण के लिए, पारिस्थितिकी में सब कुछ एक उचित अनुपात में होना चाहिए। लेकिन जब मानवीय कार्यकलापों से अवांछित पदार्थ इसमें इसमें मिल जाते हैं, तो यह हमारी पारिस्थितिकी को प्रदूषित बना देता है।

प्रदूषण मनुष्यों के साथ-साथ सभी जीवित प्राणियों के लिए बहुत खतरनाक है। प्रदूषण मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों के कारण होता है, जो कभी- कभी आलस्य और अशिक्षा के कारण और कभी कभी पैसे कमाने के लालच में पर्यावरण को नजरअंदाज करके किये गए कार्यों के कारण होता है। यह कई प्रकार के जानलेवा रोगों जैसे कैंसर, अस्थमा आदि का कारण बनता है। इसलिए, पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।

वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण सहित प्रदूषण कई प्रकार के हैं, और इन सबके जिम्मेदार आधुनिक मानव समाज ही है जो अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए पर्यावरण और पारिस्थितिकी की समृधि को नजरंदाज कर रहा है।

वायु प्रदूषण कई प्रकार के जानलेवा रोगों जैसे अस्थमा और कैंसर, का कारण है जो की निम्न वायु गुणवत्ता के कारण होता है। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण हमारे पर्यावरण में मौजूद गैसों में संदूषण है जो उद्योगों, मोटर वाहनों, आतिशबाजी और कृषि अपशिष्टों से जलने वाले धुएं के कारण होता है। इस धुएं में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे खतरनाक गैसे शामिल है जो मानव के साथ-साथ सभी जीवित प्राणियों के लिए जानलेवा है।

जल प्रदूषण दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषण है जो डायरिया, पीलिया, टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का कारण है जो हर वर्ष लाखों लोगों के मौत का कारण बनता है। जल प्रदूषण का मुख्य कारण औद्योगिक कचरा, शहरी अपशिष्ट एवं अनेक प्रकार के कृषि रसायन इत्यादि हैं जो नदियों में मिलकर नदियों के जल के साथ साथ भूमिगत जल को भी गन्दा कर देतें है

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