प्यूल यूत' पाठ में 'यूलि भर ही विश कहा गया है।
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कविता में नीले पंखों वाली एक छोटी-सी चिड़ियाँ का वर्णन है। यह चिड़ियाँ संतोषी है। थोड़े से अन्न के दाने इसके लिए पर्याप्त हैं। यह मुँहबोली है। एकांत में भी उमंग से गाती है। यह गर्वीली भी है। अपने साहस और हिम्मत पर इसे गर्व है।
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यह पंक्ति अक्कमहादेवी अपने प्रथम वचन में उस समय कहती हैं जब वे अपने समस्त विकारों को शांत हो जाने के लिए। कह चुकी हैं। इसका आशय है कि इंद्रियों के सुख के लिए भाग-दौड़ बंद करने के पश्चात् ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सरल हो जाता है। अतः चराचर (जड़-चेतन) को संबोधित कर कहती हैं कि तू इस मौके को मत खोना। विकारों की शांति के पश्चात् ईश्वर प्राप्ति का अवसर तुम्हारे हाथ में है, इसका सदुपयोग करो।
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