पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए
मैं दीपक हूँ, जलना मेरा काम है,
रातों के घर, मेरी उम्र गुलाम है।
मैं माटी का राजकुँवर, माटी में मिल जाऊँगा, लेकिन जब तक साँस चलेगी बस उजियारा लाऊँगा,
मेरी बाती सूरज का विश्राम है
।
मैं सूरज का वंशज हूँ, कुल को दाग न लगने दूंगा ड्योढ़ी पर रहते मैं, तम के पाँव न जमने ढूँगा, राह कठिन है मेरी, पर निष्काम है।
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Deepak
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जलता दीपक
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