Question 4:
भाव स्पष्ट कीजिए -
(क) क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की
(ख) बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूँघट सरके।
Class 9 NCERT Hindi Kshitij Chapter मेघ आए
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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता ‘मेघ आए’ प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त कविता है। इसमें कवि ने बादलों के आने को एक मेहमान के रूप में पेश किया है। कवि ने आकाश में मेघों के आने का वर्णन की तुलना गांव में सज सवंरकर आने वाले दमाद के साथ की है। जिस प्रकार दमाद के आने पर गांव में प्रसन्नता का वातावरण उत्पन्न हो जाता है उसी प्रकार मेघा के आने पर धरती के प्राकृतिक उपादान उमंग में झूम उठते हैं।
उत्तर :
क) धरती मानों बादलों से कह रही हो कि क्षमा करो।
अभी तक हम समझ रहे थे कि आकाश में उमड़-घुमड़ कर आए बादल बरसेंगे नहीं, पर अब यह भ्रम टूट गया है। इससे यह ध्वनि भी उत्पन्न होती है कि तुम्हारे कभी न आने का जो भ्रम बना हुआ था वह टूट गया है।
ख) नदी अपने प्रवाह को थोड़ा और रोककर ठिठक कर खड़ी हो गई। नदी रूपी गांव की नदी रूपी युवती ने अपने मुंह पर घूंघट सरका लिया और तिरछी नज़रों से सजे सवंरे बादलों की ओर देखने लगी।
आशा है कि यह उत्तर आपकी मदद करेगा।
उत्तर :
क) धरती मानों बादलों से कह रही हो कि क्षमा करो।
अभी तक हम समझ रहे थे कि आकाश में उमड़-घुमड़ कर आए बादल बरसेंगे नहीं, पर अब यह भ्रम टूट गया है। इससे यह ध्वनि भी उत्पन्न होती है कि तुम्हारे कभी न आने का जो भ्रम बना हुआ था वह टूट गया है।
ख) नदी अपने प्रवाह को थोड़ा और रोककर ठिठक कर खड़ी हो गई। नदी रूपी गांव की नदी रूपी युवती ने अपने मुंह पर घूंघट सरका लिया और तिरछी नज़रों से सजे सवंरे बादलों की ओर देखने लगी।
आशा है कि यह उत्तर आपकी मदद करेगा।
abhi569:
Nice speed mam
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13
your ans is in the pic..
hope helped..
hope helped..
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