'राखी का मूल्य' पाठ पर आधारित हुमायूं और कर्मवती की कहानी काॅपी में कीजिए।
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'दो कलाकार’, कहानी में मन्नू जी की गहरी मनोवैज्ञानिक पकड़, मध्यवर्गीय विरोधाभासों के तलस्पर्शी अवगाहन, विश्लेषण और समाज की स्थापित, आक्रांत नैतिक जड़ताओं के प्रति प्रश्नाकुलता आदि तमाम लेखकीय विशेषताओं का प्रतिनिधित्व है, जिस कारण मन्नूजी हिन्दी की आधुनिक कथा-धारा में अपना विशिष्ट स्थान बनाए हुए हैं।
उनका ‘मैं हार गई’ कहानी-संग्रह की कहानियाँ इसी मानवीय अनुभूति के धरातल पर रची गई हैं, जिनके पात्र वायवीय दुनिया से परे, संवेदनाओं और अनुभव की ठोस तथा प्रामाणिक भूमि पर अपने सपने रचते हैं और ये सपने परिस्थितियों, परिवेश और अन्याय की परम्पराओं के दवाब के सामने कभी-कभी थकते और निराश होते भले ही दिखते हों, लेकिन टूटते कभी नहीं पुनः पुनः जी उठते हैं।
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humayun ne apna dera kahan dla tha
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