संस्कृत व्याकरण में दीर्घ स्वर एवं oshdhya व्यंजन उदाहरण देकर समझाइए
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अक् (अ, इ, उ, ऋ, लृ ) के आगे सवर्ण स्वर (समान स्वर) के रहने पर दीर्घ एकादेश होता है। एकादेश से यहाँ तात्पर्य दो स्वरों के स्थान पर एक ही स्वर के आदेश होने से है। धातृ + ऋकार: = धातृृकार: लृ के उदाहरण अप्रसिद्ध व् अप्रचलित होने के कारण यहाँ नहीं दिए जा रहे है।
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