संत काव्य धारा के प्रनतननचध Kavi का नाम लि
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संत काव्य धारा के प्रनतननचध Kavi का नाम लि
हिंदी सन्त काव्य का प्रारम्भ निर्गुण काव्य धारा से होता है |
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने नामदेव और कबीर द्वारा प्रवर्तित भक्ति धारा को ‘निर्गुण ज्ञानाश्रयी धारा’ की संज्ञा प्रदान की है |
3. डा. रामकुमार वर्मा ने इसे ‘सन्त काव्य परम्परा’ जैसे विशेषण से अभिहित किया है |
4. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इसे ‘निर्गुण भक्ति साहित्य’ का नाम दिया है |
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