सुदामा-श्री कृष्ण कि मित्रता के संदर्भ मैं लिखिए कि आजकल ऐसी मित्रता दुर्लभ क्यों है आज के युग की मित्रता की धारणा किस तरह की है और यह कितनी उचित है
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श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता बेमिसाल मानी जाती है। श्रीकृष्ण ने सुदामा जी की दीन दशा को दूर कर उसे अपने समान सुदामापुरी का वैभव - सुख प्रदान किया।
आज के युग में ऐसी मित्रता देखनी ही दुर्लभ हो गयी है। अब मित्रता केवल स्वार्थ पर निर्भर करती है, ऐसे मित्रता में ह्रदय की पवित्रता एवं निर्मलता नहीं रहती हैं।
- श्रीकृष्ण और सुदामा जी की मित्रता बहुत ही पवित्र और बिना स्वार्थ की मित्रता थी।
- श्री कृष्ण और सुदामा जी एक मित्र धनवान और दूसरा मित्र बहुत ही दरिद्र गरीब होता है। धनवान मित्र गरीब मित्र की सहायता करता है तो ऐसे मित्रों के बीच मित्रता को श्रीकृष्ण और सुदामा जी की मित्रता जैसा उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
- श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता समाज में समानता का संदेश देती है। इस लीला के माध्यम से प्रभु श्री कृष्ण ने सभी को यह बताने की कोशिश की है कि समाज में कोई बड़ा नहीं और कोई छोटा नहीं होता है। सभी समान है भक्ति का श्रृंगार कर भगवान से मिलने की प्रतीक्षा करो तो भगवान अवश्य ही मिलेंगे।
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