Science, asked by anil531, 1 year ago

सल्फ्यूरिक अम्ल को तनु बनाने के लिए जल नहीं मिलाते हैं,क्यों?​

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Answered by shahinahmed62718
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सलफ़्यूरिक अम्ल (Sulphuric Acid) प्राचीनकाल के कीमियागर एवं रसविद् आचार्यों को सलफ़्यूरिक अम्ल के संबंध में बहुत समय से पता था। उस समय हरे कसीस को गरम करने से यह अम्ल प्राप्त होता था। बाद में फिटकरी को तेज आँच पर गरम करने से भी यह अम्ल प्राप्त होने लगा। प्रारंभ में सलफ़्यूरिक अम्ल चूँकि हरे कसीस से प्राप्त होता था, अत: इसे 'कसीस का तेल' कहा जाता था। तेल शब्द का प्रयोग इसलिए हुआ कि इस अम्ल का प्रकृत स्वरूप तेल सा है।

प्राय: सभी आधुनिक उद्योगों में सलफ़्यूरिक अम्ल अत्यावश्यक होता है। अत: ऐसा माना जाता है कि किसी देश द्वारा सलफ़्यूरिक अम्ल का उपभोग उस देश के औद्योगीकरण का सूचक है। सलफ़्यूरिक अम्ल के विपुल उपभोगवाले देश अधिक समृद्ध माने जाते हैं।

प्रयोगशालाओं में निम्नांकित तीन रीतियों से अल्प मात्रा में सलफ़्यूरिक अम्ल तैयार किया जा सकता है : (1) सल्फ़र ट्राइऑक्साइड को जल में घुलाने से, (2) वायु के संसर्ग में सल्फ़्यूरस अम्ल के विलयन के मंद ऑक्सीकरण से और (3) सल्फ़र डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड की सीधी क्रिया से। औद्योगिक स्तर पर सीस-कक्ष-विधि (lead chamber process) तथा संस्पर्श विधि (contact process) से अम्ल का उत्पादन होता है। सीस कक्ष विधि में जल की उपस्थिति में नाइट्रिक अम्ल द्वारा सल्फ़र डाइऑक्साइड के ऑक्सीकरण से अम्ल बनता है। यह क्रिया बड़े बड़े सीस कक्षों में संपन्न होती है अत: इसका नाम सीस-कक्ष-विधि पड़ा है। संस्पर्श विधि में सल्फ़र अथवा आयरन सल्फ़ाइड सदृश किसी सल्फ़ाइड के दहन से सल्फर डाइऑक्साइड पहले बनता है और वह प्लैटिनम धातुयुक्त ऐसबेस्टस उत्प्रेरक की उपस्थिति में वायु के ऑक्सीजन द्वारा सल्फ़र ट्राइऑक्साइड में परिणत हो जाता है, जो जल में घुलकर सलफ़्यूरिक अम्ल बनता है।

व्यापारिक सलफ़्यूरिक अम्ल शुद्ध नहीं होता। आंशिक शोधित अम्ल के प्रभाजित क्रिस्टलन से शुद्ध अम्ल प्राप्त होता है। सलफ़्यूरिक अम्ल जल के साथ मिलकर अनेक हाइड्रेट बनाता है, जिनमें सलफ़्यूरिक मोनोहाइड्रेट अपेक्षाकृत अधिक स्थायी होता है। इस गुण के कारण सांद्र सलफ़्यूरिक अम्ल उत्तम शुष्ककारक होता है। यह वायु से ही जल को नहीं खींचता वरन्‌ कार्बनिक पदार्थों से भी जल का अंश खींच लेता है। जल के अवशोषण में अत्यधिक ऊष्मा का क्षेपण होता है, जिससे अम्ल का विलयन बहुत गरम हो जाता है। सांद्र सलफ़्यूरिक अम्ल प्रबल ऑक्सीकारक होता है। ऑक्सीजन के निकल जाने से यह सलफ़्यूरस अम्ल बनता है, जिससे सल्फ़र डाइऑक्साइड निकलता है। अनेक धातुओं पर सलफ़्यूरिक अम्ल की क्रिया से सल्फ़र डाइऑक्साइड प्राप्त होता है।

सलफ़्यूरिक अम्ल एक प्रबल अम्ल है। इसका रासायनिक सूत्र हा2 गं औ4 (H2SO4) है। यह रंगहीन तेल सदृश गाढ़ा द्रव होता है। शुद्ध अवस्था में 25 सें. ताप पर इसका घनत्व 1.834 है। इसका हिमांक 10.5 सें. है। सलफ़्यूरिक अम्ल का प्रयोग अनेक उद्योगों में होता है जिनमें से निम्नांकित प्रमुख हैं : (1) उर्वरक उद्योग में, जैसे सुपरफास्फेट, अमोनियम सल्फेट आदि के निर्माण में, (2) पेट्रोलियम तथा खनिज तेल के परिष्कार में, (3) विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में, (4) कृत्रिम तंतुओं, जैसे रेयन तथा अन्य सूतों, के उत्पादन में, (5) पेंट, वर्णक, रंजक इत्यादि के निर्माण में, (6) फ़ॉस्फ़ोरस, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल धावन सोडा तथा अन्य रसायनकों के निर्माण में, (7) इनैमल उद्योग, धातुओं पर जस्ता चढ़ाना तथा धातुकर्म उद्योगों में, (8) बैटरी बनाने में (9) ओषधियों के निर्माण में, (10) लौह एवं स्टील, प्लास्टिक तथा अन्य रासायनिक उद्योगों में। प्रयोगश्शालाओं में सलफ़्यूरिक अम्ल का प्रयोग विलायकों, निर्जलीकारकों (desiccating agent) तथा विश्लेषिक अभिकर्मकों के रूप में होता है। सलफ़्यूरिक अम्ल इतने अधिक एवं विभिन्न उद्योगों में प्रयुक्त होता है कि उन सभी का उल्लेख यहाँ संभव नहीं है।

सलफ़्यूरिक अम्ल का जल में आयनीकरण होता है। इससे विलयन में हाइड्रोजन धनायन, बाइसल्फ़ेट तथा सल्फ़ेट ऋणायन बनते हैं। रासायनिक विश्लेषण की सामान्य रीतियों से सलफ़्यूरिक अम्ल में गंधक, ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन की उपस्थिति जानी जा सकती है। सलफ़्यूरिक अम्ल का संरचनासूत्र सामान्यत: निम्नांकित रूप में लिखा जाता है :

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