short essay on भोजन का बदलता स्वरूप in hindi
Answers
तब ब्रेड बहुत कम चलन में थी‚ नाश्ते में दो बिस्किट खा कर रह जाने वाले न थे हमारे बच्चे। सुबह शाम बच्चे ताज़ा दूध पीते थे‚ टिफिन में रोटी‚ सब्जी लेकर जाते थे। धीरे–धीरे जीवन–शैली में बदलाव आया‚ महिलाओं ने रसोई के साथ–साथ आर्थिक मोर्चा संभाला‚ संयुक्त की जगह एकांगी परिवारों में बढ़ोत्तरी हुई। लम्बी भोजन विधियों और सुबह शाम रसोई में बिताने से गृहणी उकताने लगी तो‚ ब्रेड घरों में आई। रिफाईन्ड मैदा और बेकिंग पाउडर का उपभोग बढ़ा‚ केक‚ मैगी‚ आइसक्रीम‚ बिस्किट‚ जैम‚ कस्टर्ड आदि के जरिये कई खाद्य रंगों‚ इमल्सीफायर‚ प्रिजर्वेटिव्स आदि के रूप में कई रसायन हम उदरस्थ करने लगे। हमारे भोजन में रेशे और पोषक तत्वों की भारी कमी आने लगी। बच्चे–बड़े अन्य आकर्षणों के चलते दूध पीने से कतराने लगे।
पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण से धूम्रपान‚ शराब और मांसाहार का चलन बढ़ गया। जो कि भारतीय मौसम के बहुत अनुकूल न था। भारत की जलवायु के अनुसार हम पाश्चात्य जीवन शैली को अपना कर अपना हित नहीं कर रहे। ठण्डे प्रदेशों में शराब जहाँ टॉनिक का काम करती है वहीं भारत में इसके विपरीत असर देखे गए हैं।
अब यह हाल है कि पिछले बारह सालों में शहरों में उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों की संख्या‚ करीब चौगुनी हो गई है। यह चौंकाने वाली बात थी। इस विषय पर कुछ दिशानिर्दशों की आवश्यकता महसूस की गई। अभी कुछ समय पूर्व ही द एसोसिएशन ऑफ फीजीशियन्स ऑफ इण्डिया‚ कार्डियोलॉजी सोसायटी और द हाइपरटेन्शन सोसायटी ने मिलकर अपने स्तर पर दो वर्ष से अधिक का समय लगा कर भारतीय परिस्थितियों‚ बदलती भारतीय जीवन शैली को ध्यान में रख कर दिशानिर्देशों की एक सूची तैयार की है।
रक्त का सामान्य दबाव एक सहज बात है जिसकी वजह से रक्त शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचता है। हृदय एक पम्प की तरह काम करता है‚ जब दिल धड़कता है तो वह धमनियों तक रक्त प्रवाहित करता है‚ धमनियों में इस वजह से पैदा होने वाले सर्वाधिक दबाव को सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। और जब दो बार दिल धड़कने के बीच के समय में धमनियों में जो दबाव होता है वह डायस्टोलिक प्रेशर कहलाता है। रक्तचाप के मापने का उपर वाली संख्या सिस्टोलिक प्रेशर तथा नीचे वाली संख्या डायस्टोलिक प्रेशर के माप को दर्शाती है। रक्तचाप की आदर्श स्थिति र्है 120/80 इससे उपर खतरे की सीमा है।
अभी तक भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन और इन्तरनेशनल सोसायटी ऑफ हायपर टेन्शन की ओर से जारी दिशानिर्देश ही प्रचलित थे। किन्तु अब इन नए भारतीय दिशा निर्देशों में भारतीय जलवायु‚ खानपान‚ जीवनशैली‚ उपलब्ध दवाओं और संस्कृति को ध्यान में रखा गया है। भारत की विभिन्न जलवायु और संस्कृति की विभिन्नता को भी सामने रखा गया।
short essay on भोजन का बदलता स्वरूप in hindi
भोजन का बदलता स्वरूपर शार्ट निबंध :
बदलते दौर में आज का खानपान भी बदल गया है। आज के समय में लोग फास्ट फूड को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं।आजका खाना स्वास्थ्य की जगह जीभ पर केंद्रित हो गया है। आजकल लोग जीभ के स्वाद को अधिक महत्व दे रहे हैं।
फास्ट फूड का प्रचलन इसी बात का उदाहरण है। फास्ट फूड स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अधिक पौष्टिक भोजन नहीं होता बल्कि यह स्वास्थ्य को नुकसान ही पहुंचाता है लेकिन लो फिर भी फस्टबूट को ही अधिक पसंद करते हैं।
आज पारंपरिक खाने का स्वरूप बदलता जा रहा है। पहले पारंपरिक भोजन सेहत से भरपूर होता था और प्राकृतिक तरीके से ही बनाया जाता था। पहले फास्टफूड और जंकफूड का प्रचलन अधिक नही था, इसलिए लोग पारंपरिक भोजन करने में कोई भी अरूचि महसूस नहीं करते थे।
जैसे जैसे भोजन का स्वरूप बदलता गया और लोग फास्ट फूड की ओर आकर्षित होते गये। समोसा, चाइनीस, कचोरी, वडापाव, छोले भटूरे, आइसक्रीम स्वास्थ्य की दृष्टि से पौष्टिक भोजन नहीं है लेकिन फिर भी लोग इनकी तरफ आकर्षित है। इसलिए बदलते समय में भोजन का स्वरूप भी बदलता जा रहा है। लोग फास्टफूड और जंक फूड का अधिक सेवन करने लगे हैं। इसी कारण लोग अधिक बीमार भी पड़ने लगे हैं।
#SPJ2
Learn more:
https://brainly.in/question/7380486
यदि शब्द न होते तो......in essay hindi?
https://brainly.in/question/51381420
'सुबह की किरण' विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए।