Math, asked by Ram0726, 4 months ago

Solve by factorization method
bx2+abx=0​

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Answered by henabhorali
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Answer:

at igjh sleep 4 all XL fall so

Step-by-step explanation:

full URL to gcdj7wt754 tu yury is not a problem with 5 hmmm bghghjjhggjv

Answered by ankitraj272727
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जब राजेश्वर दोस्ती निभाता है तो अफसाने लिक्खे जाते हैं..

और जब दुश्मनी करता है तो तारीख़ बन जाती है

– राजेश्वर सिंह, सौदागर (1991)

#2. जिसके दालान में चंदन का ताड़ होगा, वहां तो सांपों का आना-जाना लगा ही रहेगा.

– पृथ्वीराज, बेताज बादशाह (1994)

चिनॉय सेठ, जिनके अपने घर शीशे के हों, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते.

– राजा, वक्त (1965)

#4. बेशक मुझसे गलती हुई. मैं भूल ही गया था, इस घर के इंसानों को हर सांस के बाद दूसरी सांस के लिए भी आपसे इजाज़त लेनी पड़ती है. और आपकी औलाद ख़ुदा की बनाई हुई ज़मीन पर नहीं चलती, आपकी हथेली पर रेंगती है.

– सलीम अहमद ख़ान, पाक़ीज़ा (1972)

#5. जब ख़ून टपकता है तो जम जाता है, अपना निशान छोड़ जाता है, और

चीख़-चीख़कर पुकारता है कि मेरा इंतक़ाम लो, मेरा इंतक़ाम लो.

– जेलर राणा प्रताप सिंह, इंसानियत का देवता (1993)

#6. बिल्ली के दांत गिरे नहीं और चला शेर के मुंह में हाथ डालने. ये बद्तमीज हरकतें

अपने बाप के सामने घर के आंगन में करना, सड़कों पर नहीं.

– प्रोफेसर सतीश ख़ुराना, बुलंदी (1980)

हम अपने कदमों की आहट से हवा का रुख़ बदल देते हैं.

– पृथ्वीराज, बेताज बादशाह (1994)

#8. जानी.. हम तुम्हें मारेंगे, और ज़रूर मारेंगे.. लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी,

गोली भी हमारी होगी और वक़्त भी हमारा होगा.

– राजेश्वर सिंह, सौदागर (1991)

#9. महा सिंह, शायद तुम अंजाम पढ़ना भूल गए हो. लेकिन ये याद रहे कि इंसाफ के जिन सौदागरों के भरम पर,

तुम फर्ज़ का सौदा कर रहे हो, उनकी गर्दनें भी हमारे हाथों से दूर नहीं.

– जगमोहन आज़ाद, पुलिस पब्लिक (1990)

#10. हम वो कलेक्टर नहीं, जिनका फूंक मारकर तबादला किया जा सकता है. कलेक्टरी तो हम शौक़ से करते हैं, रोज़ी-रोटी के लिए नहीं. दिल्ली तक बात मशहूर है कि राजपाल चौहान के हाथ में तंबाकू का पाइप और जेब में इस्तीफा रहता है. जिस रोज़ इस

कुर्सी पर बैठकर हम इंसाफ नहीं कर सकेंगे, उस रोज़ हम इस कुर्सी को छोड़ देंगे. समझ गए चौधरी!

– राजपाल चौहान, सूर्या (1989)

याद रखो, जब विचार का दीप बुझ जाता है तो आचार अंधा हो जाता है और हम अंधेरा फैलाने नहीं, अंधेरा मिटाने आए हैं.

– साहब बहादुर राठौड़, गॉड एंड गन (1995)

#12. हम कुत्तों से बात नहीं करते.

– राणा, मरते दम तक (1987)

#13. हम तुम्हें वो मौत देंगे, जो ना तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी

और ना ही कभी किसी मुजरिम ने सोची होगी.

– ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह, तिरंगा (1992)

#14. अगर सांप काटते ही पलट जाए तो उसके ज़हर का असर होता है वरना नहीं. हम सांप को काटने की इजाज़त तो दे

सकते हैं लेकिन पलटने की इजाज़त नहीं देते परशुराम.

– पृथ्वीराज, बेताज बादशाह (1994)

#15. राजा के ग़म को किराए के रोने वालों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी चिनॉय साहब.

– राजा, वक्त (1965)

#16. घर का पालतू कुत्ता भी जब कुर्सी पर बैठ जाता है तो उसे उठा दिया जाता है. इसलिए क्योंकि कुर्सी उसके

बैठने की जगह नहीं. सत्य सिंह की भी यही मिसाल है. आप साहेबान ज़रा इंतजार कीजिए.

– साहब बहादुर राठौड़, गॉड एंड गन (1995)

#17. शेर को सांप और बिच्छू काटा नहीं करते..

दूर ही दूर से रेंगते हुए निकल जाते हैं.

– राजेश्वर सिंह, सौदागर (1991)

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