Tell me the english translation of:न चोरहार्य न च राजहार्य न भातृभाज्यं न च भारकारि।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम् ॥१॥
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सुभाषितानि के प्रस्तुत श्लोक में कहा गया है , जिसे न चोर चुरा सकते हैं, न राजा हरण कर सकता है, न भाई बँटा सकते हैं, जो न भार स्वरुप ही है, जो नित्य खर्च करने पर भी बढ़ता है, ऐसा विद्या धन सभी धनों में प्रधान है।
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Answer:
the wealth of knowledge is the best if wealth it can't be stolen by their not conquered by king. it cannot be divided between 2 brothers not it weight on one as a burdon. if we spend it then it increases.
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