Hindi, asked by rinurini7316, 6 hours ago

वीरता की भावना से ओत-प्रोत एक लघु ( Short story ) कथा लिखिए। (150 words ) in hindi ​

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Answered by anamikachy078
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वीरता व्यक्ति का आंतरिक गुण है जो विपरीत हालातों के बीच अमुक लोगों में ही दीखता हैं. हम में से कोई स्वयं को कायर नहीं समझता है इसका मतलब यह नहीं कि हम सभी सच्चे वीर और शौर्यपुरुष हैं.

सामान्य हालातों में स्वयं को बहादुर कहने वाले अक्सर लोग जरा सी तकलीफ में मुरझा जाते हैं या छिप जाते है जो उसके मूल चरित्र के दिक्दर्शन करवाता हैं.वीरता के दर्शन भी मित्रता की तरह ही हैं क्योंकि हमेशा सबसे अच्छा मित्र कहने वाला हमारा कितना हितैषी है यह तभी पता चलता है जब हम किसी विपदा या कठिनाई में पड़े हो.

सेना, पुलिस में वीरता के लिए सम्मान एवं मेडल प्रदान किये जाते हैं. हालांकि वे पदक व्यक्ति की बहादुरी को ब्यान तो नहीं करते मगर समाज, सरकार व देश द्वारा उन्हें सम्मानित करने का यह रिवाज हैं.

सच्ची वीरता के दर्शन करने हो तो भारतीय सैनिक को ही देख लीजिए गर्मियों में 45 डिग्री का तापमान हो या शरीर को जमा देने वाली ठंड वो सदैव अपनी जिंदगी की फ़िक्र किये बगैर अपने कर्तव्यों को निभाने में लगा रहता हैं.

आज के दौर में वीरता के साक्ष्य न केवल हमारी सेना के जवान पेश करते है बल्कि  हमारे पुलिसकर्मी, आम नागरिक  खिलाड़ी भी अपनी क्षमताओं से ऊपर उठकर समाज के लिए योगदान करते हैं.

मात्र पदक को ही वीरता माना जाए तो पाकिस्तानी सेना के जनरल पर कपड़े के वजन से अधिक तमगे लटकते हैं. मगर वे किस शौर्य के प्रदर्शन का दिखावा हैं पाक फौज ने किस युद्ध में शौर्यगाथा रची जिसे वह इन पदकों के माध्यम से दिखाता हैं.प्रत्येक भारतीय वीर पायलट अभिनंदन की गाथा से तो परिचित ही होगा, अपने वतन की वायु सीमा को बचाते हुए उनका विमान दुश्मन के हमले का शिकार हो जाता हैं वह पैराशूट की मदद से गलती से दुश्मन मुल्क में उतरते हैं.

यहाँ तक एक साधारण व्यक्ति की तरह वे अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं. मगर पाक लोगों रेजर्स और पुलिस के द्वारा पकड़ने से पूर्व और बाद में सुझबुझ और जिस अदम्य साहस का परिचय दिया वह प्रत्येक भारतीय सैनिक की पहचान है जिसे दुश्मन भली भांति परिचित हैं.

हरेक नागरिक में वीरता के गुण होने चाहिए ताकि विकट हालातों में वे अपने समाज व देश को संकट से बचाने में जो भी मान वीय योगदान हो सके वह करें.

वीरता तभी जगेगी जब उत्कृष्ट योगदान करने वाले वीरों को यथेचित सम्मान मिले यही सम्मान लोगों को भी शौर्य दिखाने के लिए प्रेरित करता हैं. क्योंकि वीरता का गुण उतना जन्मजात नहीं होता जो उन्हें वातावरण बनाता हैं.

एक शेर के बच्चें को जन्म से ही भेडियो के बीच छोड़ दिया जाए तो भले ही वह संसार का सबसे खतरनाक प्राणी हो वह व्यवहार में दुर्बल भेडिये की तरह की व्यवहार करेगा. इसलिए हमारे बच्चों को वह वातावरण मिलना चाहिए जिससे वे बहादुरी का प्रदर्शन कर सके.

देश की केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय वीरता पुरूस्कार के माध्यम से ऐसा ही प्रयास किया जाता हैं. बाल कल्याण परिषद द्वारा वर्ष 1957 में वीरता सम्मान की शुरुआत की गई थी.

जिन्हें 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर पदक, प्रमाण पत्र एवं नकद पुरूस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने विविध क्षेत्रों में कीर्तिमान खड़े किये है अथवा सामाजिक क्षेत्र में किसी साहसिक कार्य को अंजाम दिया हो.अब तक देश में ९०० बच्चों को यह सम्मान दिया जा चूका हैं. हमारे बच्चों में वीरता का सद्गुण विकसित करने के लिए बचपन से ही उन्हें हमारे वीर पुरुषों की कहानियां सुनानी चाहिए.

2 अक्टूबर,1957 में पंडित नेहरु के समक्ष एक ऐसी एतिहासिक घटना घटित हुई जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर वीरता सम्मान शुरू किया गया.

नवरात्र के दिन थे दिल्ली के रामलीला मैदान में पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, जगजीवन राम जैसी हस्तियाँ विराजमान थी, अचानक उस शामियाने की आतिशबाजी में शोर्ट सर्किट हो गया तथा आग की लपटों में सभी घिर गये.

उस समय 14 वर्षीय बालक हरीश मेहरा स्वयंसेवक के रूप में सेवाएं दे रहे थे. स्काउड छात्र हरीश तुरंत बीस फिट ऊँचे लाइट के खम्भे पर चढ़े तथा अपनी ड्रेस में से चाक़ू निकालकर विद्युत् तार को काट दिया.

उनके इस साहसिक कार्य में दोनों हाथ पूरी तरह झुलस गये. मगर हरीश की इस जाबाजी ने एक बड़ा हादसा होने से बचा लिया था.

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