6. पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दी
हमारे हरि हारिल की लकरी
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस- निसि, कान्ह-कान्ह जकरी।
सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी।
सुतो व्याधि हम कौं लै आए, देखी सुनी न करी।
यह तो 'सूर तिनहिं लै सोंपो, जिन के मन चकरी।।
क. उपयुक्त पद में किसके द्वारा किस को संदेश दिया गया
ख. गोपियां श्री कृष्ण को हारिल की लकड़ी क्यों कड़ती
ग. गोपियां कब-कब श्री कृष्ण को रटती थी? (1)
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