अभिव्यक्ति
मेरौ मन अनत कहाँ सुख पावै।
जैसे उहि जहाज को पंछी, फिरि जहाज पर आवै।।
कमल-नैन को छाँहि महातम, और देव को ध्यावै।
परम गंग को छाँहि पियासो, दुरमति कूप खनावै।।
जिहि मधुकर अम्बुज-रस चाख्यो, क्यों करील-फल भावै।
सूरदास प्रभु कामधेनु तजि, छेरी कौन दुहावै।
क) सूरदास जी किस ब्रह्म के उपासक
Answers
Answered by
7
Answer:
भावार्थ :- यहां भक्त की भगवान् के प्रति अनन्यता की ऊंची अवस्था दिखाई गई है। जीवात्मा परमात्मा की अंश-स्वरूपा है। उसका विश्रान्ति-स्थल परमात्माही है , अन्यत्र उसे सच्ची सुख-शान्ति मिलने की नहीं। प्रभु को छोड़कर जो इधर-उधर सुख खोजता है, वह मूढ़ है। कमल-रसास्वादी भ्रमर भला करील का कड़वा फल चखेगा ?कामधेनु छोड़कर बकरी को कौन मूर्ख दुहेगा ?
MARK AS BRAINLIEST PLEASE
Answered by
2
Answer:
okkkkvctjdjydhymcmhckhhfy!ckgccbc b!cjggk
Similar questions