*"अनुभव कहता है*
*खामोशियाँ ही बेहतर हैं,*
*शब्दों से लोग रूठते बहुत हैं..."*
*जिंदगी गुजर गयी....*
*सबको खुश करने में ..*
*जो खुश हुए वो अपने नहीं थे,*
*जो अपने थे वो कभी खुश नहीं* *हुए...*
*कितना भी समेट लो..*
*हाथों से फिसलता ज़रूर है..*
*ये वक्त है साहब..*
*बदलता ज़रूर है.
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ये पंक्तियां शायरी से ली गई है।
इन पंक्तियों का अर्थ :
- जो अनुभवी लोग है वे जानते है कि कभी कभी चुप रहना चाहिए। बुद्धिमान लोग भी ये जानते है कि कब बोलना चाहिए तथा कब चुप रहना चाहिए। यह दुनिया बड़ी स्वार्थी हो गई है। हर कोई मतलब परस्त हो गया है। हर किसी को अपनी प्रशंसा ही सुननी है। आपने यदि किसी को सच कह दिया कि तुम गलत हो तो सामने वाला बुरा मान जाएगा। इसलिए कहा गया है कि खामोशी ही बेहतर है। बोलोगे तो लोग नाराज हो जाएंगे।
- आगे कहा गया है कि हम तो यही प्रयत्न करते है कि सभी हमसे खुद रहें कोई भी नाराज न हो। यही सोच कर सारा जीवन गुजार दिया। कभी किसी बात का बुरा भी लगता तो नहीं कहते थे कि बुरा न लग जाए। स्वय में ही कुड़ते रहते थे। सामने से कभी किसी को कुछ न कहा। इतना कुछ किया फिर भी सभी को खुश नहीं रख पाए।
- हमें दूसरे फिर भी समझ पाए लेकिन अपनों ने कभी समझने की कोशिश नहीं की। आप कितनी भी कोशिश कर को, आप के अपने कभी खुश नहीं होंगे। पराए फिर भी खुश हो जाते है।
- वक्त को आप कितना भी पकड़ने की कोशिश करोगे वह हाथो से फिसलता जाता है क्योंकि वक़्त कभी किसी के लिए नहीं रुकता। वक्त हमेशा एक जैसा भी नहीं रहता , बदलता रहता है। आज दुख है तो कल सुख जरूर आएगा।
#SPJ6
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