२. प्रवासी पक्षियों को उनके घर का रास्ता ढूंढने में तारों, सूरज व पृथ्वी की चुंबकीय शक्ति
सहायता करती है जानकारी प्राप्त कर लिखिए -
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पक्षियों का प्रवास काफी सारे घटकों पर निर्भर करता है, जैसे पक्षियों की प्रजाति, प्रवास की दूरी, यात्रा की गति, रास्ता, जलवायु आदि।
प्रवास से पहले ये पक्षी ‘हाइपरफैगिया’ (अधिक भोजन की इच्छा ) अवस्था (फेज )में चले जाते हैं, जहां हार्मोन स्तर (लेवल )में बदलाव होता है और इनका शारीरिक वजन जबर्दस्त बढ़ता है, जिससे इनके शरीर में फैट जमा होता है। प्रवास के दौरान उड़ने के लिए ये अपने शरीर में जमा इस वसा (फैट) से ही ऊर्जा (एनर्जी )लेते हैं।
यह आश्चर्यजनक है कि प्रवास के लिए एक ओर का रास्ता तय करने में एक चि़ड़िया को कुछ हफ्तों से लेकर चार महीने तक लग जाते हैं। यह प्रवास का सफर- कुल दूरी, उड़ने की गति, रास्ता और ठहराव आदि पर निर्भर करता है। काफी सारे ऐसे पक्षी होते हैं, जो दिन के वक्त ही उड़ते हैं, पर इनमें से कुछ ऐसे भी हैं, जो रात को उड़कर अपने प्रवास की दूरी तय करते हैं।
ये प्रवासी पक्षी तारों, सूर्य, हवा के बहने के तरीके और जमीन के प्राकृतिक बनाव से रास्ते को पहचानते हैं, जो उनके नैविगेशन (परिभ्रमण) में मददगार साबित होता है। पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र भी प्रवास (माइग्रेशन) में मददगार है।