Hindi, asked by sharmayogesh0408, 8 months ago

शृंगार रस, करुण रस, शांत रस की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए

Answers

Answered by sonuchauhan8810
5

Answer:

helo guys its your answer

Explanation:

— करुण रस का उदाहरण स्पष्टीकरण सहित. 8. हाय रुक गया यहीं संसार बना

शांत रस के भेद. रस के भेद- रस 9 प्रकार के होते हैं परन्तु वात्सल्य एवं भक्ति

Answered by ashuguptafzd16
2

Answer:

करुण रस

उदाहरण

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –स्थायी भाव – शोक

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –स्थायी भाव – शोकआश्रय – राम

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –स्थायी भाव – शोकआश्रय – रामउद्दीपन – लक्ष्मण का मूर्चछित शरीर ,रात का सुनसान समय।

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –स्थायी भाव – शोकआश्रय – रामउद्दीपन – लक्ष्मण का मूर्चछित शरीर ,रात का सुनसान समय।आलम्बन – लक्ष्मण

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –स्थायी भाव – शोकआश्रय – रामउद्दीपन – लक्ष्मण का मूर्चछित शरीर ,रात का सुनसान समय।आलम्बन – लक्ष्मणअनुभाव – लक्ष्मण को उठाकर गले लगाना, अश्रु, स्वर भंग आदि।

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –स्थायी भाव – शोकआश्रय – रामउद्दीपन – लक्ष्मण का मूर्चछित शरीर ,रात का सुनसान समय।आलम्बन – लक्ष्मणअनुभाव – लक्ष्मण को उठाकर गले लगाना, अश्रु, स्वर भंग आदि।व्यभिचारी-भाव – आवेग, चिन्ता, विषाद आदि।

उदाहरणअर्ध राति गयी कपि नहिं आवा। राम उठाइ अनुज उर लावा ॥सकइ न दृखित देखि मोहि काऊ। बन्धु सदा तव मृदृल स्वभाऊ ॥जो जनतेऊँ वन बन्धु विछोहु। पिता वचन मनतेऊँ नहिं ओहु॥स्पष्टीकरण-इस पद्य में करुण रस है । रस सामग्री इस प्रकार है –स्थायी भाव – शोकआश्रय – रामउद्दीपन – लक्ष्मण का मूर्चछित शरीर ,रात का सुनसान समय।आलम्बन – लक्ष्मणअनुभाव – लक्ष्मण को उठाकर गले लगाना, अश्रु, स्वर भंग आदि।व्यभिचारी-भाव – आवेग, चिन्ता, विषाद आदि।रस – करुण

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