Write Poem on dowry
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`दहेज - एक पाप`
हर एक वो लड़की जो इस धरती पर आती है ,
हाँ वो दहेज प्रथा की आदी है।
वो घर में पैदाइश के तुरंत बाद हड़कंप मचा देती है,
सबको उसकी शादी की डर अब सताती है।
जूट गए घर वाले पैसा जमाने में,
यहां लड़की को छोड़ दिया गया काम काज सीखने में।
पराई थी वो तो उस घर के लिए,
इसलिए सब छोड़ अब शादी की खोज शुरू की गई।
जितना भी रुपैया पैसा दिया गया,
टूटना तो उसके लकीरों में लिखा था,
रोज हर पल खाती थी वो ससुराल की बोलियां,
आखिर कितना कम लाई है तू गहने और सोने की चूड़ीयाँ l
इतने तक वो सीमित नहीं रहने वाले थे,
जैसे पेड़ लगा था पैसों का,
जब भी जाओ मायके,
कुछ भर ठूस कर माल तो लाओ।
पैसों की बरसात चाहिए,
उनको किसका साथ चाहिए,
लड़की के मायके से पैसा आते रहे,
खुशहाल जिंदगी तभी है उनकी,
जब उस पैसों से वो अपना ज़हरीला घर सजाते रहे।
पराई तो उसे उसके घर वालों ने,
जीवन के पहले दिन ही बता दिया था,
परन्तु उस दूसरे अपने घर में भी,
उसे पराया ही बताया गया था।
साथ उसको कब मिला था,
अकेले ही तो जी रही थी,
अंत में आत्महत्या कर ली,
तो किसको दर्द हुआ,
जुदा तो सबसे पहले ही वो हो चुकी थी।
अब सिर्फ इतनी कामना कर चली वो,
आगे किसी को ना सेहना पड़े इतना,
परन्तु कुछ लोग तो अभी भी नहीं समझे,
इस पाप का दर्द होता है कितना।
- @Itzѕēиõяıтα
The only best way to stop dowry system now is:-
The only best way to stop dowry system now is:-" Don't expect and take dowry so that you don't have to give dowry ."