small poem of Barish in Hindi
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वर्षा के स्वागत में तोते
उड़ते नभ में खुश होते
सारस ऊंची टेर लगाते
दूर -दूर तक उड़ते जाते
कुहू-कुहू कर रहे पपीहे
नव साहस भर रहे पपीहे
रही न पीछे कहीं टिटहरी
सखी बनी वर्षा की गहरी
बता रहे बच्चे बकरी के
उछल-कूद के नए तरीके
फुदक रही चिड़िया की टोली
बादल है सबके हमजोली
ताक रही बच्चो की बारी
नाव चलाने की तैयारी
बादल बरसे लगा ठहाके
आसमान में बगुले झांकें
– डॉ. जगदीशचंद्र शर्मा
aqibjawedkhan9p5p8sa:
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निशि के तम में झर झर
हलकी जल की फूही
धरती को कर गई सजल ।
अंधियाली में छन कर
निर्मल जल की फूही
तृण तरु को कर उज्जवल !
बीती रात,…
धूमिल सजल प्रभात
वृष्टि शून्य, नव स्नात ।
अलस, उनींदा सा जग,
कोमलाभ, दृग सुभग !
कहाँ मनुज को अवसर
देखे मधुर प्रकृति मुख ?
भव अभाव से जर्जर,
प्रकृति उसे देगी सुख ?
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